ज्ञानवापी सर्वे पर मुस्लिम पक्ष बोला- कुरेदे जाएंगे पुराने जख्म; SC ने याद दिलाया राम मंदिर मसला
मुस्लिम पक्ष अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ज्ञानवापी मस्जिद में एएसआई सर्वेक्षण का इरादा इतिहास में जाना है और यह अतीत के घावों को फिर से हरा देगा।

सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू पक्ष को राहत देते हुए शुक्रवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में वैज्ञानिक सर्वेक्षण की अनुमति दी गई थी। सर्वेक्षण यह तय करने के लिए किया जा रहा है कि क्या 17वीं शताब्दी की मस्जिद का निर्माण एक हिंदू मंदिर की पहले से मौजूद संरचना पर किया गया है। प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने एएसआई को सर्वेक्षण के दौरान किसी भी तरह की तोड़फोड की कार्रवाई से मना कर दिया। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील ने पुराने जख्मों के कुरेदे जाने का जिक्र किया तो सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर मामला याद दिला दिया।
दरअसल, मुस्लिम पक्ष अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ज्ञानवापी मस्जिद में एएसआई सर्वेक्षण का इरादा इतिहास में जाना है और यह अतीत के घावों को फिर से हरा देगा। मस्जिद प्रबंधन समिति की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हुज़ेफ़ा अहमदी ने मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष दलील दी कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की यह कवायद इतिहास को कुरेदना, पूजा स्थल अधिनियम का उल्लंघन करना और भाईचारे को प्रभावित करना है। इस पर पीठ ने कहा, "आप एक ही आधार पर हर अंतरिम आदेश का विरोध नहीं कर सकते और आपकी आपत्तियों पर सुनवाई के दौरान फैसला किया जाएगा।"
सीजेआई ने अयोध्या मामले का किय जिक्र
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने राम मंदिर मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ''यहां तक कि अयोध्या मामले में भी हमने सर्वे करने की इजाजत दी थी। अंतिम सुनवाई के उस चरण में, इस पर काफी चर्चा हुई... फिर हमने चर्चा की कि एएसआई का साक्ष्य वैल्यू क्या होनी चाहिए। ये ऐसे मुद्दे हैं जिनसे तब निपटना होगा। हम संरचना की रक्षा करेंगे।'' अहमदी ने पूछा, "अगर कल कोई एक तुच्छ मुकदमा दायर करता है और पहली तारीख पर सर्वेक्षण के लिए कहता है कि क्या एएसआई को सर्वेक्षण के लिए कहेंगे?" सीजेआई ने जवाब दिया, "जो आपके लिए तुच्छ है वह दूसरे पक्ष के लिए आस्था है। हम कैसे टिप्पणी कर सकते हैं?" अहमदी ने तर्क दिया, "मैं कह रहा हूं कि जब रखरखाव पर गंभीर संदेह हैं तो सर्वेक्षण न करें।"
'अतीत के घावों को फिर से कुरेदेगा'
अहमदी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए सर्वेक्षण के आदेश पर कहा, "एएसआई सर्वेक्षण का इरादा इतिहास में यह जानने का है कि 500 साल पहले क्या हुआ था। यह अतीत के घावों को फिर से कुरेद देगा।" चल रही सुनवाई के दौरान, अहमदी ने कहा कि सर्वेक्षण पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 का उल्लंघन करता है, जो 1947 में मौजूद धार्मिक स्थानों के चरित्र में बदलाव पर रोक लगाता है। शीर्ष अदालत ज्ञानवापी मस्जिद में एएसआई सर्वेक्षण की अनुमति देने वाले इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ मस्जिद समिति की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट ने गुरुवार को ज्ञानवापी समिति द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें जिला अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें एएसआई को यह निर्धारित करने के लिए सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया था कि क्या मस्जिद पहले से मौजूद मंदिर पर बनाई गई थी।
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