क्रिश्चियन नहीं, भगवान भी अलग; केरल में सीरियल ब्लास्ट का शिकार यहोवा का साक्षी समूह कौन
केरल के एर्नाकुलम में रविवार को सीरियल ब्लास्ट हुआ। यह धमाके एक ईसाई कन्वेंशन सेंटर में हुआ, जो यहोवा के साक्षी समूह का था। इस प्रार्थना समूह के दौरान 2500 लोग जुटे हुए थे। धमाके में एक मौत हुई है।

केरल के एर्नाकुलम में रविवार को सीरियल ब्लास्ट हुआ। यह धमाके एक ईसाई कन्वेंशन सेंटर में हुआ, जो यहोवा के साक्षी समूह का था। इस प्रार्थना समूह के दौरान 2500 लोग जुटे हुए थे। इस धमाके में एक मौत हुई है, जबकि 40 अन्य घायल हो गए थे। जिस यहोवा के साक्षी समूह पर हमला हुआ है वह केरल में बड़ी संख्या में मौजूद है। आइए जानते हैं आखिर क्या है यहोवा का साक्षी समूह और कैसे यह क्रिश्चियन से अलग हैं...
अमेरिका में उत्पत्ति
यहोवा के साक्षी समहू की उत्पत्ति अमेरिका में 19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में हुई थी। यह अपनी खास मान्यताओं और पूजा पद्धति के लिए जाने जाते हैं, जो उन्हें मूल ईसाइयों से अलग करता है। इस समूह के मुताबिक भगवान का नाम यहोवा है और वह मानते हैं कि दुनिया का अंत होने वाला है। यह समूह ईसाइयों के उस सिद्धांत को नहीं मानता, जिसके मुताबिक भगवान, क्राइस्ट और होली स्पिरिट ईश्वर का ही अंश हैं। इनके मुताबिक केवल यहोवा ही एकमात्र सच्चे भगवान और सभी चीजों को बनाने वाले हैं। साथ ही उनका मानना है कि सभी पूजा-पाठ केवल उन्हीं के लिए होनी चाहिए।
जीसस भगवान से अलग
यहोवा का साक्षी समूह जीसस को भगवान से अलग मानता है। उनका मानना है कि वह उद्धारक हैं और भगवान के बेटे हैं। समूह बाइबल के अपने मेहनती उपयोग के लिए जाना जाता है, जिसे वे अंतिम अधिकार मानते हैं। उनकी मान्यताएं बाइबल की सभी 66 किताबों पर आधारित हैं। इसकी मान्यताओं के अनुसार, केवल 144,000 व्यक्तियों को स्वर्ग में मसीह के साथ शासन करने के लिए चुना जाएगा, जबकि अधिकांश मनुष्य आर्मागिडॉन के बाद धरती पर बने एक स्वर्ग में रहेंगे। यह लोग आर्मागिडॉन को एक प्रलयकारी घटना के रूप में देखते हैं। उनकी कुछ अन्य अनूठी प्रथाओं में क्रिसमस और ईस्टर जैसी छुट्टियों का जश्न नहीं मनाना शामिल है। इसके अलावा यह लोग ब्लड डोनेशन से बचते हैं, क्योंकि यह लोग खून को पवित्र मानते हैं।
भारत में है इतनी मौजूदगी
समूह के अनुसार, भारत में उनके लगभग 56,747 मंत्री हैं जो बाइबल पढ़ाते हैं। वर्तमान में, समूह की भारत में 947 मण्डली हैं। दुनिया के दूसरे हिस्सों की तरह भारत में भी यहोवा के साक्षी सार्वजनिक गवाही देने के कामों में लगे रहते हैं। वे अक्सर सार्वजनिक स्थानों जैसे बाजारों, पार्कों और परिवहन केंद्रों में साहित्य स्टैंड बनाते हैं। ये स्टैंड अपने पब्लिकेशन की फ्री कॉपी देते हैं। साथ ही लोगों को अपने विश्वास के प्रति चर्चा में शामिल करते हैं। भारत में यहोवा के साक्षी समय-समय पर अधिवेशन और सम्मेलनों का आयोजन करते हैं। साथ ही यह लोग पढ़ाई पर खासा जोर देते हैं।
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