शिवसेना सिंबल विवाद: शिंदे गुट की दलीलें पूरी, जवाब के लिए ठाकरे गुट को 17 जनवरी तक का समय
महाराष्ट्र में असली शिवसेना और नकली शिवसेना विवाद पर एकनाथ शिंदे गुट ने चुनाव आयोग के सामने अपना दावा पेश कर दिया है। जिसके बाद अब चुनाव आयोग ने ठाकरे गुट को जवाब देने के लिए कहा है।

शिवसेना के चुनाव चिह्न को लेकर उद्धव ठाकरे गुट और एकनाथ शिंदे गुट में तकरार जारी है। मंगलवार को चुनाव आयोग के सामने इस मसले पर सुनवाई है। सुनवाई के दौरान शिंदे गुट ने असली शिवसेना होने का दावा पेश किया। शिंदे गुट के दावे को देखते हुए चुनाव आयोग ने उद्धव ठाकरे गुट को शिंदे गुट के दावे का जवाब देने के लिए 17 जनवरी तक का समय दिया है।
मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा, 'शिंदे के नेतृत्व वाले धड़े ने आज अपनी बहस पूरी कर ली।' प्रक्रिया में कहा गया है कि आयोग पहले याचिकाकर्ता की बात सुनेगा, उसके बाद प्रतिवादी की। जिसके बाद उद्धव ठाकरे गुट ने जवाब देने के लिए समय मांगा था। शिंदे गुट की ओर से आपत्ति के बाद आयोग ने पिछले साल अक्टूबर में शिवसेना के गुट को 3 नवंबर को होने वाले अंधेरी पूर्व विधानसभा उपचुनाव से पहले पंजीकृत पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह, धनुष और तीर का उपयोग करने से रोक दिया था। चुनाव आयोग की ओर से दोनों गुटों को अलग-अलग चुनाव चिह्न दिए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट के 1971 के एक फैसले का दिया हवाला
पीटीआई-भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट ने चुनाव आयोग के समक्ष सुप्रीम कोर्ट के 1971 के एक फैसले का हवाला दिया, जिसने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाले समूह को मूल कांग्रेस के रूप में मान्यता दी थी। शिवसेना के एकनाथ शिंदे नीत गुट ने इस फैसले का हवाला बालासाहेब ठाकरे द्वारा स्थापित पार्टी पर दावा पेश करते हुए दिया।
चुनाव आयोग के सामने शिंदे गुट के वकील महेश जेठमलानी ने यह भी कहा कि 2018 में उद्धव ठाकरे द्वारा शिवसेना के संविधान में गुप्त और असंवैधानिक बदलाव और पार्टी में वैचारिक बदलाव आया। इसके चलते पार्टी ने 2019 में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकंपा) के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाई, जो संगठन में विभाजन का कारण बनी।
विधायकों के बगावत के बाद गिर गई थी सरकार
शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के ज्यादातर विधायकों ने बगावत कर दी, जिसके चलते उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार गिर गई और फिर शिंदे पिछले साल जून में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के समर्थन से महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बने। तब से शिवसेना के शिंदे और ठाकरे गुटों में संगठन पर नियंत्रण को लेकर लड़ाई चल रही है।
शिंदे गुट बोला संख्या बल हमारे पास
जेठमलानी ने निर्वाचन आयोग के समक्ष अभ्यावेदन देने के बाद संवाददाताओं से कहा, 'असली शिवसेना हम हैं। हमारे पास संख्या बल है और वास्तविक संगठन पर भी हमारा नियंत्रण है। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ठाकरे गुट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वह 17 जनवरी को निर्वाचन आयोग के समक्ष अपनी दलील रखेंगे।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।