भारत में डेंगू का टीका कब तक? क्यों हो रही है ट्रायल में देरी
देश में पिछले एक दशक में डेंगू के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक हालिया डेटा में कहा गया है कि देश में जनवरी और अक्टूबर 2022 के बीच कुल 1,10,473 मामले दर्ज किए गए।

राष्ट्रीय डेंगू दिवस के दिन विशेषज्ञों ने मच्छर जनित बीमारी से लड़ने के लिए तीव्र प्रयासों पर जोर दिया है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने डेंगू के पहले टीके की टेस्टिंग को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा, "परीक्षण चल रहे हैं लेकिन वे अभी तक पूरी तरह से शुरू नहीं हुए हैं क्योंकि हम कंपनी की तरफ से GMP प्रोडक्ट बनाने का इंतजार कर रहे हैं जो 3 महीने पहले नहीं बनाया जा सका था। इन्हें अगस्त में तैयार हो जाना चाहिए। इसलिए, उन तीसरे चरण के परीक्षणों को कुछ महीनों में शुरू किया जाना चाहिए।"
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने पिछले साल नवंबर में भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) से डेंगू के टीके के तीसरे चरण के परीक्षण की अनुमति मांगी थी। देश में पिछले एक दशक में डेंगू के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित सबसे हालिया डेटा में कहा गया है कि देश में जनवरी और अक्टूबर 2022 के बीच कुल 1,10,473 (1.1 लाख से अधिक) डेंगू के मामले दर्ज किए गए।
इस बारे में विशेषज्ञों ने बताया, "डेंगू के लिए एक टीका बनाने में मुख्य चुनौतियों में से एक यह है कि वायरस के चार अलग-अलग सीरोटाइप या वैरिएंट हैं, जिससे ऐसा टीका बनाना मुश्किल हो जाता है जो चारों को समान रूप से टारगेट कर सके।"
विशेषज्ञों ने कहा, "तीव्र संचरण के दौरान वायरस तेजी से विकसित होने के साथ नए तरह से उभर सकते हैं और बड़े पैमाने पर मुश्किल पैदा कर सकते हैं, जिससे रोग की गंभीरता में वृद्धि हो सकती है।" विशेषज्ञों का मानना है कि डेंगू के टीके विकसित करने के प्रयास किए गए हैं, डेंगू के ट्रीटमेंट को लेकर को काफी हद तक उपेक्षित किया गया है, कम लागत के कारण डेंगू मुख्य रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देशों को प्रभावित करता है।
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