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नीतीश सरकार के बाद अब कांग्रेस की बारी, CWC बुलाकर लेगी जातिगत जनगणना पर बड़ा फैसला

कांग्रेस भी अब जातिगत सर्वे को अपने लिए हथियार के तौर पर देख रही है। इसी को और धार देने के लिए उसने कार्यसमिति की मीटिंग बुलाई है, जिसमें कई बड़े फैसले हो सकते हैं। इसकी शुरुआत कर्नाटक से होगी।

Surya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीThu, 5 Oct 2023 10:42 AM
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नीतीश सरकार के बाद अब कांग्रेस की बारी, CWC बुलाकर लेगी जातिगत जनगणना पर बड़ा फैसला

लोकसभा चुनाव में भाजपा के मुकाबले कांग्रेस को जातीय जनगणना के नाम पर एक हथियार मिलता दिख रहा है। इसी को धार देने के लिए पार्टी ने अब कार्यसमिति की बैठक बुलाने का फैसला लिया है। सूत्रों के मुताबिक अगले सप्ताह यह मीटिंग होगी और इसमें जातीय जनगणना के मुद्दे पर कैसे आगे बढ़ा जाए, इस पर चर्चा होगी। पार्टी नेताओं के मुताबिक हाईकमान को लगता है कि यह मसला उसे कई राज्यों में उत्तर से दक्षिण तक लोकसभा इलेक्शन में संजीवनी प्रदान कर सकता है। राहुल गांधी तो लगातार मांग कर ही रहे हैं कि देश भर में जातीय जनगणना हो ताकि कमजोर तबके के लिए योजनाएं बनाई जा सकें, जिससे उन्हें फायदा हो।

माना जा रहा है कि इस मीटिंग में कांग्रेस इसे लेकर कुछ प्रस्ताव भी पारित कर सकती है। इसमें से एक प्रस्ताव यह भी हो सकता है कि आबादी के अनुपात में अब आरक्षण पर विचार किया जाए। इसके अलावा महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मिलने वाले 33 फीसदी आरक्षण में भी ओबीसी कोटा अलग से रखा जाए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी इसे लेकर उत्साहित हैं और देश भर में जातीय जनगणना चाहते हैं। भले ही यूपी और बिहार में इसका फायदा सपा, आरजेडी और जेडीयू जैसे दलों को मिले, लेकिन कांग्रेस को लगता है कि राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में उसे फायदा मिलेगा।

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद कर्नाटक में जातीय सर्वे के आंकड़े भी जारी किए जा सकते हैं। अब तक कई राज्यों में ऐसी मांग उठा चुकी कांग्रेस पर खुद दबाव है कि वह कर्नाटक के आंकड़े जारी करे। 2015 में ही पहले वाली सिद्धारमैया सरकार ने एक समिति का गठन किया था। उसे जातीय गणना का काम सौंपा गया और 170 करोड़ रुपये का बजट भी तय हुआ था। अब तक यह आंकड़ा जारी नहीं हुआ है, जिसे भाजपा समेत कई लोग जारी करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि कर्नाटक में कांग्रेस के लिए जातीय जनगणना परेशानी भी बन सकती है। इसकी वजह यह है कि आमतौर पर भाजपा के साथ जाने वाले लिंगायतों की आबादी काफी अधिक है और वे कांग्रेस से नाराज चल रहे हैं। 

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कांग्रेस के सीनियर नेता बीके हरिप्रसाद भी मांग कर चुके हैं कि बिहार की तर्ज पर ही कर्नाटक में जातीय जनगणा के आंकड़े जारी किए जाएं। उनका कहना है कि जातीय सर्वे की मांग लंबे समय से हो रही है और इससे उन जातियों के लिए योजनाओं को तैयार करने में मदद मिलेगी, जिन्हें वास्तव में मदद की दरकार है। अब जब राहुल गांधी भी इसके पक्षधर हो गए हैं तो उम्मीद की जा रही है कि कांग्रेस कर्नाटक से ही इसकी शुरुआत कर सकती है। यही नहीं छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इसे चुनावी घोषणा पत्र में भी शामिल किया जा सकता है। 

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