कांग्रेस ने अगले सप्ताह कार्यसमिति की बैठक भी बुलाई है। इसमें ओबीसी आरक्षण पर विचार हो सकता है। इसके अलावा कर्नाटक में हुए जातीय सर्वे की रिपोर्ट को जारी करने का भी फैसला हो सकता है
कांग्रेस भी अब जातिगत सर्वे को अपने लिए हथियार के तौर पर देख रही है। इसी को और धार देने के लिए उसने कार्यसमिति की मीटिंग बुलाई है, जिसमें कई बड़े फैसले हो सकते हैं। इसकी शुरुआत कर्नाटक से होगी।
ओडिशा में ओबीसी आबादी में बड़ा इजाफा भी दर्ज किया गया है क्योंकि 2011 की जनगणना में इनकी आबादी 43 फीसदी ही थी। ओडिशा राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक सूबे में 208 पिछड़ी जातियां हैं।
जातिगत जनगणना के आंकड़े जारी होने के बाद भाजपा के सामने हिंदू वोट बैंक के बंटने की चुनौती खड़ी है। ऐसे में सबसे ज्यादा जरूरी है ओबीसी वोट को संभालना जिसके लिए भाजपा का प्लान तैयार है।
सर्वे के नतीजों के बाद राजनीतिक तौर पर बहस शुरू हो सकती है और उसका असर 2024 के लोकसभा चुनाव पर भी देखने को मिलेगा। यही नहीं अब सुप्रीम कोर्ट के 1992 के फैसले को लेकर भी चर्चा होने लगी है।
फिलहाल बिहार में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) को 18 फीसदी, पिछड़ा वर्ग को 12 फीसदी, अनुसूचित जाति को 16, अनुसूचित जनजाति को एक, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 और महिलाओं को 3 फीसदी आरक्षण दिया जा रहा है।
Bihar Caste Survey Data: कर्पूरी ठाकुर जब जून 1977 दूसरी बार बिहार के CM बने थे, तब उन्होंने 1978 में बिहार में लागू कुल आरक्षण में से 12 फीसदी अति पिछड़ों और 8 फीसदी पिछड़ों के लिए निर्धारित किया था।
बेंगलुरु में हुई बैठक में विपक्ष ने एक बार फिर जातिगत जनगणना की मांग दोहराई थी। विपक्ष का मानना है कि अगर जातिगत जनगणना हुई तो भाजपा को हिंदू वोट बैंक बिखऱ जाएगा।
ओडिशा OBC सर्वेक्षण करने वाला बिहार के बाद दूसरा राज्य है। एक अधिकारी ने बताया कि सर्वेक्षण में पिछड़ेपन के विभिन्न संकेतक शामिल किए गए हैं जिसमें पिछड़ेपन की सामाजिक और शैक्षिक स्थिति का आंकलन होगा।