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धनुष बाण के बाद त्रिशूल पर भी शिंदे गुट की नजर, भड़के आदित्य ठाकरे

शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे का कहना है कि शिंदे गुट नहीं चाहता है कि उन्हें त्रिशूल निशान भी मिले। उन्होंने कहा कि शिंदे गुट ने इस निशान पर पहले ही दावा ठोक दिया है।

Ankit Ojha एजेंसियां, मुंबईMon, 10 Oct 2022 05:44 PM
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धनुष बाण के बाद त्रिशूल पर भी शिंदे गुट की नजर, भड़के आदित्य ठाकरे

अंधेरी विधानसभा उपचुनाव के लिए चुनाव आयोग ने 'शिवसेना' और चुनाव चिह्न 'धनुष बाण' को दो गुटों में घमासान के चलते सीज कर दिया है। अब उद्धव ठाकरे गुट ने चुनाव आयोग को तीन चुनाव चिह्न और पार्टी के तीन नाम भेजे हैं। इसमें त्रिशूल, मशाल और उगता हुआ सूरज शामिल है। वहीं पार्टी के जो नाम भेजे गए हैं उनमें शिवसेना (बालासाहेब ठाकरे), शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और शिवसेना(बालासाहेब प्रबोधंकर ठाकरे) शामिल हैं। उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे का कहना है कि शिंदे गुट नहीं चाहता है कि उन्हें त्रिशूल या मशाल चुनाव चिह्न मिले इसिलिए उसने पहले ही इन निशानों का दावा कर दिया है। 

आदित्य ठाकरे बागी गुट के विधायकों पर जमकर बरसे। आदित्य ठाकरे अपने विधानसभा क्षेत्र वर्ली में सड़क पर उतरे और लोगों से संवाद किया। विद्रोह पर सावल पूछे जाने पर आदित्य ने का, इस बात की हमें बिल्कुल उम्मीद नहीं थी लेकिन धोखा दिया गया। अब हमने लड़ने और जीतने का फैसला किया है। राज्य में जो भाजपा और शिंदे गुट की सरकार बनी है वह असंवैधानिक है। देशद्रोहियों का एक गुट खुलेआम देश में राजनीति का स्तर नीचे गिरा रहा है। 

उन्होंने कहा, ऐसी गंदी राजनीति महाराष्ट्र और देश ने कभी नहीं देखी। वे चाहते हैं कि शिवसेना खत्म हो जाए लेकिन ऐसा कभी कर नहीं पाएंगे। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की जनता शिवसेना और उद्धव ठाकरे के साथ खड़ी है। आदित्य ठाकरे ने कहा, शिवसेना से बगावत करने वाले देशद्रोही आज मुख्यमंत्री और मंत्री बने हैं। अगर उन्हें विरोध करना ही था तो सामने से करते। उन्हें पीठ में छुरा नहीं घोंपना चाहिए था। 

उन्होंने कहा, मेरे पिता जी और दादा जी ने इन 40 देशद्रोहियों को भी राजनीतिक पहचान दी थी। अब वे शिवसेना के नाम और चिह्न का प्रयोग करके हमपर ही हमला करने लगे हैं। मैं इन्हें चुनौती देता हूं कि अपने पदों से इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ें और जीतकर दिखाएं। उन्होंने कहा, यह लड़ाई पूरे देश के लिए अहम है क्योंकि इसीसे तय होगा कि देश की राजनीति में आगे क्या होने वाला है। 

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