यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी, इस रूट पर चलेगी नई MEMU ट्रेन; रेल मंत्री ने दिखाई हरी झंडी
मेमू ट्रेन हाई टेक्नोलॉजी और एडवांस फीचर्स से लैस होती है। इन ट्रेनों का इस्तेमाल आमतौर पर 200 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने के लिए होता है। इसमें 4 कोच के साथ 1 पावर कार लगी होती है।

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यात्रियों को नई सौगात दी है। उन्होंने शनिवार को गोपीनाथपुर नीलगिरि-बालासोर यात्री रेलवे लाइन के 18 किलोमीटर लंबे खंड का उद्घाटन किया। साथ ही उन्होंने नई शुरू की गई मेमू ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। रेलवे अधिकारी ने कहा कि दक्षिण-पूर्व रेलवे संभाग में गोपीनाथपुर नीलगिरि से बालासोर के बीच मेमू ट्रेन दिन में 3 बार चलेगी। गोपीनाथपुर नीलगिरि रेलवे स्टेशन पर ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के बाद वैष्णव ने नरेंद्र मोदी नीत केंद्र सरकार की तारीफ की। उन्होंने कहा कि अब ओडिशा को रेलवे बुनियादी ढांचे के विकास के लिए हर साल औसतन 10,000 करोड़ रुपये मिलते हैं, जबकि संप्रग सरकार के तहत राज्य के लिए आवंटन राशि बहुत कम थी।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेलवे ढांचे के विकास के लिए ओडिशा पर पीएम मोदी का विशेष ध्यान है। मंत्री ने दावा किया, 'जहां रेल पटरी का औसत विस्तार पहले केवल 25 से 30 किलोमीटर प्रति वर्ष होता था, अब राष्ट्रीय नेटवर्क में यह 1 साल में 450 किलोमीटर से अधिक हो गया है।' ओडिशा में रेलवे परियोजनाओं का जिक्र करते हुए वैष्णव ने कहा कि जलेश्वर-चंदनेश्वर रेल मार्ग सर्वेक्षण का काम पूरा हो चुका है और इसे जल्द ही पश्चिम बंगाल के दिघा तक बढ़ा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बालासोर जिले के खातापाड़ा में एक नया रेलवे फ्लाईओवर भी शुरू किया जाएगा।
जानें क्या होती है मेमू ट्रेन
दक्षिण-पूर्व रेलवे के अधिकारी ने कहा कि 14 जनवरी से गोपीनाथपुर नीलगिरि-बालासोर के बीच रोजाना तीन जोड़ी मेमू यात्री विशेष ट्रेन चलेंगी। मालूम हो कि देश के 18 रेलेव जोन में करीब 19 हजार से ज्यादा ट्रेनें चलती हैं। इन ट्रेनों को अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया है। इन्हीं में एमू, डेमू और मेमू ट्रेनें शामिल हैं। मेमू (MEMU) का मतलब है- मेन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट। यह ट्रेन हाई टेक्नोलॉजी और एडवांस फीचर्स से लैस होती है। इन ट्रेनों का इस्तेमाल आमतौर पर 200 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने के लिए होता है। इसमें 4 कोच के साथ 1 पावर कार लगी होती है। मेमू ट्रेन का ज्यादातर इस्तेमाल एक शहर को दूसरे शहर से जोड़ने में होता है। इनकी रफ्तार पैसेंजर ट्रेनों से ज्यादा होती है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
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