क्यों फेल हो रहा मुख्यमंत्री पद का सीट रोटेशन सिस्टम? कहीं कर्नाटक का न हो राजस्थान वाला हाल
कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद के लिए छिड़े घमासान में सिद्धारमैया सबसे आगे नजर आ रहे हैं। लेकिन डीके शिवकुमार जिद कर रहे हैं कि उन्हें पद मिलना चाहिए। दोनों का क्या होगा इसका फैसला कल होगा।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाली कांग्रेस पार्टी मुख्यमंत्री पद के लिए उम्मीदवार चुनने के लिए जद्दोजहद कर रही है। मुख्यमंत्री पद के लिए छिड़े घमासान में सिद्धारमैया सबसे आगे नजर आ रहे हैं। लेकिन डीके शिवकुमार जिद कर रहे हैं कि उन्हें पद मिलना चाहिए। इस मौके पर, यह पता चला कि एक प्रस्ताव था कि सिद्धारमैया को पहले दो वर्षों के लिए मुख्यमंत्री का पद संभालना चाहिए और शेष तीन वर्षों के लिए यह पद शिव कुमार को सौंप दिया जाना चाहिए। बताया जाता है कि पहले दो वर्षों में शिव कुमार को उपमुख्यमंत्री के पद के साथ-साथ कुछ प्रमुख मंत्री पद भी दिए जाएंगे। राजस्थान में कांग्रेस की सरकार गठन के दौरान दौरान अशोक सिंह गहलोत और सचिन पायलट के साथ भी सीटों का बंटवारा ऐसे ही किया गया था, मगर आलम ये है कि दोनों तो बीच आज तकरार राजस्थान का मौजूदा सियासी ड्रामा बना हुआ है।
राज्य में मुख्यमंत्री का पद बहुत महत्वपूर्ण होता है। मुख्यमंत्री सरकार की ओर से कोई भी फैसला ले सकता है। विकास योजनाओं पर उसकी मुहर के बिना काम नहीं पूरा हो पाता। राज्य के सभी विभागों पर इसका नियंत्रण होता है। थोड़े समय के लिए इन सभी शक्तियों का अनुभव करने और महसूस करने के बाद, पद छोड़ने का विचार किसी को भी अच्छा नहीं लगता होगा।
विफल रहा सीएम सीट का बंटवारा
दो नेताओं के इतर दो पार्टियों के बीच सत्ताओं का हस्तांतरण काफी टेढ़ी खीर साबित होती है। एक बार उत्तर प्रदेश में बीजेपी और बीएसपी ने बारी-बारी से मुख्यमंत्री पद साझा करने का फैसला किया था। तय हुआ है कि हर छह महीने में बसपा और बीजेपी के बीच मुख्यमंत्री का पद दिया और लिया जाए। मायावती को मुख्यमंत्री पद संभाले छह महीने बीत चुके थे। बाद में इस समझौते के अनुसार मुख्यमंत्री का पद भाजपा नेता को दिया जाना चाहिए लेकिन 1997 में मायावती ने मुख्यमंत्री का पद भाजपा को सौंपने के बजाय उन्होंने पार्टी से समर्थन वापस ले लिया। बीजेपी ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और बसपा में फूट डाल दी। इतने पर ही नहीं रुका उसने कांग्रेस सहित छोटे दलों को विभाजित कर समर्थन जुटा लिया। कल्याण सिंह के नेतृत्व में बनी सरकार ने अपना कार्यकाल पूरा किया।
खड़गे करेंगे सीएम के नाम का ऐलान
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बुधवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा कर सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि खड़गे यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी और पूर्व सांसद राहुल से चर्चा के बाद यह ऐलान करेंगे। माना जा रहा है कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार में किसी एक को कर्नाटक का सीएम बनाया जा सकता है।
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