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कौन महापुरुष थे, जिन्होंने डबल इंजन शब्द का अविष्कार किया; संसद में RJD सांसद मनोज झा ने खूब कसा तंज

आरजेडी सांसद मनोज झा ने राज्यसभा में कहा कि न्यूनतम मजदूरी 178 रुपये पर टिकी हुई है। क्या यह उचित है? महंगाई की चर्चा इस पर होनी चाहिए कि गरीब की थाली में महंगाई का असर क्या है।

Madan Tiwari लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीWed, 21 Dec 2022 10:59 PM
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कौन महापुरुष थे, जिन्होंने डबल इंजन शब्द का अविष्कार किया; संसद में RJD सांसद मनोज झा ने खूब कसा तंज

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सांसद मनोज झा ने राज्यसभा में केंद्र सरकार पर कई तीखे प्रहार किए। उन्होंने 'डबल इंजन' शब्द को लेकर भी बीजेपी सरकार पर तंज कसा और कहा कि जहां डबल इंजन का एक इंजन बदल गया, वहां ट्रबल इंजन बनाने की कोशिश की जाने लगती है। यह एक चिंता का विषय है। संसद में दिए भाषण में आरजेडी सांसद ने किसान, महंगाई आदि के मुद्दे पर सरकार को जमकर घेरा। उल्लेखनीय है कि बीजेपी के कई नेता डबल इंजन शब्द का प्रयोग करते हैं, जिससे उनका मतलब केंद्र में और राज्य, दोनों में बीजेपी सरकार के होने से होता है। 

राज्यसभा में मनोज झा ने कहा, ''यह कौन से महापुरुष लोग थे, जिन्होंने डबल इंजन शब्द का अविष्कार किया। अगर यह इतनी बड़ी चीज होती तो संविधान सभा की बैठकों में भी डबल इंजन की बात हुआ करती और कहा जाता कि पूरे देश में डबल इंजन होना चाहिए। कांग्रेस की बड़ी मैजोरिटी थी, लेकिन कभी डबल इंजन की पैरोकार नहीं बनी। आजकल डबल इंजन चलता है। जहां एक इंजन बदल गया, वहां ट्रबल इंजन बनाने की कोशिश की जाती है। यह चिंता सिर्फ एक पक्ष को नहीं है।''

'ऐसा नहीं हो सकता कि बच्चे नाखुश हों और मां खुश रहें'
आरजेडी सांसद ने आगे कहा कि इंदौर एयरपोर्ट से आते हुए मैंने देखा कि 'मदर ऑफ डेमोक्रेसी होस्ट जी-20'। यह बहुत अच्छा लगा। सबके लिए गर्व का क्षण है, लेकिन ये मां बीमार चल रही हैं। दुखी भी चल रही हैं और इसके पीछे वजह यह है कि इस मां के जिसके बच्चे किसान हैं और जवान भी हैं। दोनों ही महफूज नहीं हैं और न ही युवा व श्रमिक महफूज हैं। मां तभी खुश रहेंगी, जब देश के बच्चे खुश रहें। ऐसा नहीं हो सकता कि बच्चे नाखुश हों और मां खुश रहें।

सरकार आंकड़े प्रबंधन में माहिर, बोले सांसद
उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लेकर कहा कि वह कार चलाती होंगी या फिर बैठती होंगी। कार में एक रियर व्यू मिरर होता है, जिस पर लिखा होता है कि 'ऑब्जेक्ट्स इन द मिरर आर क्लोजर देन दे अपियर'। मैं कुछ चीजों के बारे में बताने जा रहा हूं, जोकि वह देख नहीं पा रहीं या उन्हें देखने नहीं दिया जा रहा। मनोज झा ने अपने भाषण में गरीबी का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया हर क्षेत्र में गरीबी बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री कॉरपोरेट की उतनी ही चिंता करें, जितनी आम आदमी की होनी चाहिए। न्यूनतम मजदूरी 178 रुपये पर टिकी हुई है। क्या यह उचित है? महंगाई की चर्चा इस पर होनी चाहिए कि गरीब की थाली में महंगाई का असर क्या है। महंगाई की बात यह नहीं होती कि आपके समय इन्फ्लेशन इतना था। थाली में रोटियों के नजरिए से महंगाई को देखना होगा। आरजेडी सांसद ने किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि किसान की चर्चा सिर्फ इसलिए होती है कि देश को आभास रहे कि यह देश कृषि प्रधान देश है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आंकड़े प्रबंधन में माहिर है। जो उसे पसंद आता है, वह ले लेती है और बाकियों को गलत बता देती है। 

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