गेस्ट हाउस कांड की याद और मायावती पर नरमी, CM योगी और भाजपा ने अब क्या रणनीति बना ली
उत्तर प्रदेश के मऊ जिला स्थित इस सीट पर पांच सितंबर को वोटिंग होने वाली है और भाजपा किसी भी कीमत पर यह उपचुनाव जीतना चाहती है। इसके लिए वह यहां पर दलित वोटरों को लुभाने में लगी है।

वैसे तो मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने घोसी उपचुनाव से दूरी बना रखी है। लेकिन भाजपाई नेताओं ने अपने भाषणों में यहां पर उनकी मौजूदगी को बना रखा है। उत्तर प्रदेश के मऊ जिला स्थित इस सीट पर पांच सितंबर को वोटिंग होने वाली है और भाजपा किसी भी कीमत पर यह उपचुनाव जीतना चाहती है। इसके लिए वह यहां पर दलित वोटरों को लुभाने में लगी है। एक तरफ वह सपा को निशाने पर ले रही है और दूसरी तरफ मायावती पर नरमी भी बरत रही है। मायावती के नाम पर सहानुभूति बटोरने के लिए भाजपा सहारा ले रही है उस पुरानी घटना का, जिसे गेस्टहाउस कांड के नाम से जाना जाता है।
मायावती पर मेहरबान
घोसी सीट पर भाजपा के प्रत्याशी हैं दारा सिंह चौहान। उनके लिए कैंपेन करने पहुंचे थे यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अपने भाषण के दौरान उन्होंने मायावती से सहानुभूति जताया। सीएम योगी ने कहा कि जब सपा को मौका मिला तो उसने स्टेट गेस्ट हाउस कांड कर दिया। अपने भाषण के दौरान योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी पार्टियों पर जमकर हमला बोला, चाहे अखिलेश यादव की सपा हो या फिर कांग्रेस, लेकिन उन्होंने मायावती के लिए कुछ नहीं बोला। इससे यही समझ में आ रहा है कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा मायावती को निशाना बनाने से परहेज कर रही है। असल में भाजपा को लगता है कि ऐसा करने से दलित वोटर उससे दूर छिटक जाएंगे।
क्या था गेस्ट हाउस कांड
गेस्टहाउस कांड साल 1995 के जून महीने में हुआ था। आरोप है कि तब समाजवादी कार्यकर्ताओं ने लखनऊ के वीवीआईपी गेस्टहाउस में मायावती पर हमला बोला था। यह घटना तब हुई थी, जब मायावती ने मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाले गठबंधन से समर्थन वापस ले लिया था। जिस कमरे में मायावती थीं, उस पर ताला लगा दिया गया था, जबकि बाहर बड़े पैमाने पर सप समर्थक जुटे हुए थे। भाजपा नेताओं का यह भी दावा है उन्होंने ने उस वक्त मायावती को बचाया था। इस घटना ने दलितों और गैर यादव ओबीसी समुदाय के भीतर सपा को लेकर बेहद नकारात्मक संदेश भेजा था।
गेस्ट हाउस कांड पर भाजपा का जोर क्यों
आखिर भाजपा स्टेट गेस्ट हाउस कांड पर इतना जोर क्यों दे रही है। इस पर जुगल किशोर ने कहा कि हम इस कांड का मुद्दा इसलिए उठाते हैं क्योंकि भाजपा दलितों की सबसे बड़ी हितैषी है। हम लोगों को बता रहे हैं कि भाजपा ने उस घटना में एक दलित महिला मायावती के जीवन की रक्षा की थी और उनकी सरकार बनाने के लिए बसपा का समर्थन किया था। यह राज्य में भाजपा सरकार का दूसरा कार्यकाल है, लेकिन हमारी सरकार ने मायावती सरकार द्वारा बनाए गए किसी भी जिले या संस्थान का नाम नहीं बदला। भाजपा के एक नेता ने कहा कि 2024 के संसदीय चुनावों से पहले यूपी में दलितों का समर्थन हासिल करने के पार्टी ने अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। इसकी वजह यह है कि साल 2017 के मुकाबले 2022 में एससी के लिए आरक्षित सीटों पर भाजपा के प्रदर्शन में गिरावट आई थी।
सपा पर जमकर निशाना
रैली में अपने भाषण के दौरान आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव की पूर्ववर्ती सरकार को भी नहीं बख्शा। उन्होंने तत्कालीन सपा सरकार पर बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर मेडिकल कॉलेज और कांशीराम यूनिवर्सिटी का नाम बदलने का भी आरोप लगाया। अपने कार्यकाल मायावती ने लखनऊ में अंबेडकर और कांशीराम के नाम पर कई स्मारक बनवाए थे। मायावती शासन के दौरान मुख्य विपक्षी दल रही सपा पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अखिलेश ने तब यह घोषणा करके महान हस्तियों का अपमान किया था कि सत्ता में आने के बाद वह मैरिज हॉल खोलने के लिए इन स्मारकों को ध्वस्त कर देंगे।
क्यों बदल रहे स्टैंड
वैसे देखा जाए तो तत्कालीन बसपा सरकार को लेकर भाजपा ने अपना स्टैंड भी बदला है। यूपी भाजपा के एक नेता के मुताबिक उस वक्त इस तरह के स्मारकों पर जनता का धन बर्बाद करने के लिए बसपा की भाजपा द्वारा आलोचना की गई थी। लेकिन अब जिस तरह से आरोप सपा पर लगाए जा रहे हैं, उससे दिखता है कि भाजपा दलितों का वोट हासिल करने के लिए बसपा नेतृत्व पर नरमी बरत रहा है। भाजपा प्रवक्ता जुगल किशोर ने भी घोसी में प्रचार अभियान में हिस्सा लिया है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक जुगल किशोर ने कहा कि घोसी में 90 हजार से ज्यादा जाटव दलित वोटर हैं। जुगल किशोर ने दावा किया कि 70 फीसदी से ज्यादा दलित भाजपा उम्मीदवार को वोट देने जा रहे हैं। साथ ही कहा कि सपा गलत तरीकों से बाकी 30 फीसदी वोटरों को लुभाने में जुटी हुई है। बता दें कि मायावती भी जाटव समुदाय से आते हैं।
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