कुत्ते के काटने पर हर दांत के निशान के बदले मिले 10 हजार का मुआवजा, HC का बड़ा फैसला
यदि कोई आवारा कुत्ता किसी को काट लेता है तो फिर हर दांत के निशान के बदले सरकार को 10,000 रुपये का मुआवजा देना होगा। हरियाणा एवं पंजाब हाई कोर्ट ने यह आदेश दिया है। अदालत ने कुल 193 केसों की सुनवाई की।

यदि कोई आवारा कुत्ता किसी को काट लेता है तो फिर हर दांत के निशान के बदले सरकार को 10,000 रुपये का मुआवजा देना होगा। हरियाणा एवं पंजाब हाई कोर्ट ने यह आदेश दिया है। एक सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि हर दांत के निशान पर कम से कम 10000 रुपये की राहत राशि मिलनी चाहिए। इसके अलावा यदि 0.2 सेंटीमीटर मांस भी बाहर आ गया हो तो उसके एवज में कम से कम 20 हजार रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए। अदालत ने आवारा कुत्तों के द्वारा हमले से जुड़े 193 मामलों की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
हाई कोर्ट बेंच के इस आदेश से आवारा कुत्तों के काटने को लेकर एक नई बहस शुरू हो सकती है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब देश भर में आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर बहस छिड़ी हुई है। अक्टूबर महीने में ही मशहूर चाय कंपनी वाघ बकरी के सीईओ पराग देसाई पर आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया था। उससे बचने की कोशिश में वह गिर पड़े थे और उनकी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस घटना ने आवारा कुत्तों के हमलों की बहस को फिर से तेज कर दिया है। इसके अलावा गाजियाबाद में एक बच्चे की तड़प-तड़पकर पिछले दिनों मौत हुई थी और वह कुत्ते की तरह भौंकने लगा था।
वाघ बकरी चाय के सीईओ की मौत ने तो एक बार फिर से बहस तेज कर दी और सोशल मीडिया पर लोग मांग करने लगे कि इनसे बचाव के लिए कदम उठाने ही होंगे। कुत्ते के काटने के मामले की सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा, 'ऐसे मामलों में प्रशासन जवाबदेह होगा।' हाई कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ को आदेश दिया है कि वे एक कमेटी बनाएं, जो तय करे कि कुत्ते के काटने या अन्य आवारा पशुओं के हमले के मामले में कितना मुआवजा दिया जाए। आवारा पशुओं में गाय, सांड, नीलगाय, गधे, कुत्ते, भैंस और अन्य जानवर शामिल हैं।
हाई कोर्ट ने कहा कि आवारा पशुओं के हमले से जुड़े मामलों के मुआवजे के लिए बनने वाली समिति में डिप्टी कमिश्नर, एसडीए, ट्रैफिक पुलिस के एसपी अथवा डीएसपी जैसे अधिकारियों को शामिल करना चाहिए। अदालत का यह फैसला बेहद अहम है, जब आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर बहस बढ़ रही है। यही नहीं ऐसे मामलों को लेकर समाज में ध्रुवीकरण दिखता है।
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