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जब यादवों की तिकड़ी ने संसद में बरपाया था हंगामा, महिला आरक्षण बिल पर सरकार को चटा दी थी धूल

Women Reservation Bill: ये तिकड़ी 1996 यानी जब पहली बार  महिला आरक्षण बिल लागू कराने की कोशिशें तेज हुई हैं, तब से बिल का विरोध इस आधार पर करते रहे हैं कि इसमें दलितों, अल्पसंख्यकों और पिछड़ी महिलाओं

Pramod Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीTue, 19 Sep 2023 02:42 PM
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जब यादवों की तिकड़ी ने संसद में बरपाया था हंगामा, महिला आरक्षण बिल पर सरकार को चटा दी थी धूल

बात 8 मार्च, 2010 की है। तब केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार थी। उस दिन पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की 100वीं वर्षगांठ मना रही थी लेकिन हमारी संसद के अंदर महिलाओं को आरक्षण देने वाले एक बिल के पन्नों को फाड़कर सदन में न सिर्फ बिखेरा जा रहा था, बल्कि संसद के उच्च सदन राज्यसभा के सभापति के टेबल पर चढ़कर सांसद ने उनका माइक उखाड़ने की कोशिश की थी। कुछ सांसदों ने तो बिल को फाड़कर और उसका गोला बनाकर सभापति पर उछाल दिया था। इस हंगामे में तब लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल, मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी, रामविलास पासवान की लोजपा और निर्दलीय सांसद भी शामिल थे। 

अगले दिन 9 मार्च को सभापति ने हंगामा करने वाले सात सांसदों को सदन से सस्पेंड कर दिया। मार्शल उन्हें जबरन सदन से बाहर पकड़कर ले गए, तब सदन में वोटिंग हुई और यह बिल राज्यसभा से पारित हो गया। तब बिल के पक्ष में 186 वोट पड़े थे और विरोध में सिर्फ एक वोट पड़े थे। ममता बनर्जी और मायावती की पार्टी के सांसदों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया था। लेकिन जैसे ही ये बिल लोकसभा में पहुंचा, वहां विरोध और तेज हो गया। 

तिकड़ी में कौन-कौन
वहां भी यादव नेताओं की तिकड़ी (शरद यादव, मुलायम सिंह यादव और लालू यादव) इस विरोध के सूत्रधार बने। ये तीनें नेता तब राज्यसभा के सांसद नहीं थे। ये तिकड़ी 1996 यानी जब पहली बार  महिला आरक्षण बिल लागू कराने की कोशिशें तेज हुई हैं, तब से बिल का विरोध इस आधार पर करते रहे हैं कि इसमें दलितों, अल्पसंख्यकों और पिछड़ी महिलाओं के लिए आरक्षण का व्यवस्था नहीं की गई है। लालू बार-बार यही मांग करते रहे हैं कि जब तक महिला आरक्षण बिल में कोटा के अंदर कोटा नहीं दिया जाएगा तक तक विरोध करते रहेंगे।

क्या कहा था लालू-मुलायम ने?
तब लालू यादव ने संसद के बाहर ऐलान किया, "नब्बे फीसदी लोग इस बिल के खिलाफ हैं और हम इसे किसी भी कीमत पर इसे पारित नहीं होने देंगे। यह बिल राजनीतिक डकैती है, हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।" लालू की बात का समर्थन करते हुए मुलायम सिंह यादव ने तो यहां तक कह दिया, "हम सारी लक्ष्मण रेखाएं पार कर देंगे और इसे हर हाल में रोकेंगे।" 

लालू-मुलायम ने मनमोहन सरकार को चटाई धूल
इसके साथ ही सियासी खेल के माहिर लालू और मुलायम ने ऐलान कर दिया कि वे यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले रहे हैं। इसका तत्काल प्रभाव यह हुआ कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार महिला आरक्षण बिल पर बैकफुट पर आ गई और यादव तिकड़ी नेताओं को बुलाकर उनसे बात की। बाद में इस पर सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी। फिर मामला संसद की स्टैंडिंग कमेटी को भेजा गया लेकिन वहां भी कोई एकराय नहीं बन पाई। इसके बाद बिल अधर में लटक गया। और तब से लटका हुआ था।

क्यों पीछे हटी थी मनमोहन सरकार
मनमोहन सिंह की सरकार तब अल्पमत में थी और इन दलों के सहयोग से चल रही थी। अगर महिला आरक्षण पर विरोध करने वाले दलों ने समर्थन वापसी की चिट्ठी राष्ट्रपति को सौंप दी होती तो यूपीए सरकार का लोकसभा में सांसदों का आंकड़ा सिर्फ 267 रह जाता, जो बहुमत के आंकड़े से पांच कम था। ऐसे में सरकार के सामने मुश्किल यह थी कि लालू-मुलायम को मना लिया जाए, वरना वित्त जैसे महत्वपूर्ण विधेयक भी लटक जाएगा और वित्तीय संकट आ सकता है।

बीजेपी के सांसदों ने भी किया था विरोध
तब बीजेपी के भी कुछ सांसदों ने महिला आरक्षण बिल का विरोध किया था। इसमें हुकुमदेव नारायण यादव से लेकर योगी आदित्यनाथ, यशवंत सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा भी शामिल थे। इनके अलावा कई ओबीसी और दलित सांसदों ने भी बिल का विरोध किया था पार्टी से अनुरोध किया था कि इस पर पार्टी के स्तर पर चर्चा कराई जाए।

अब न मुलायम, न शरद, लालू भी संसद से बाहर:
तब महिला आरक्षण के तत्कालीन प्रारूप का विरोध करने वाले 80 सांसदों के बल पर यादवों की तिकड़ी ने सरकार को झुका दिया था लेकिन अब न तो मुलायम सिंह यादव जीवित हैं, न शरद यादव जीवित हैं। लालू यादव भी संसद से बाहर हैं और उनकी पार्टी संसद में बहुत कमजोर है।  ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि यह महिला आरक्षण बिल जिसे नारी शक्ति वंदन विधेयक नाम दिया गया है,पारित हो सकता है।

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