फिलिस्तीन से पंजाब तक जंग रहेगी; इजरायल पर हमले के बाद खालिस्तानियों ने भारत पर उगला जहर
खालिस्तानियों ने इजरायल पर हुए हमास के बर्बर हमले के बाद जहर उगला है। खुद की तुलना फिलिस्तीन से करते हुए कहा है कि फिलिस्तीन से लेकर पंजाब तक अवैध कब्जे के खिलाफ हमारी जंग जारी रहेगी।

इजरायल पर हुए हमास के बर्बर हमले के बाद कनाडा समेत कई देशों में सक्रिय खालिस्तानियों ने भारत के खिलाफ जहर उगला है। खालिस्तानी संगठन सिख्स फॉर जस्टिस ने इस हमले का समर्थन करते हुए कहा है कि यह भारत के लिए एक सबक है। अलगाववादी संगठन के उग्रवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक वायरल वीडियो में कहा, 'इजरायल और फिलिस्तीन के बीच जारी जंग भारत के लिए सबक है कि हिंसा के बदले हिंसा ही मिलती है।' यही नहीं सिख्स फॉर जस्टिस की ओर से एक बयान भी जारी किया गया है, जिसमें फिलिस्तीन से पंजाब तक आजादी की जंग जारी रहने की बात कही गई है।
खालिस्तानी संगठन ने कहा कि हर जगह अवैध कब्जे के खिलाफ जंग जारी रहेगी। इसके साथ ही हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का भी खालिस्तानी संगठन ने जिक्र किया है, जो कनाडा में ही 18 जून को मारा गया था। कनाडा के सरे में एक गुरुद्वारे के बाहर अज्ञात हमलावरों ने हरदीप सिंह निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसका आरोप खालिस्तानी संगठनों और कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर लगाया है। इसकी वजह से भारत और कनाडा के बीच रिश्ते भी खराब हुए हैं। पन्नू ने कहा कि हम कनाडा में एक रेफरेंडम भी करा रहे हैं, जिसमें लोगों से यह पूछा जा रहा है कि आपको क्या लगता है कि निज्जर की हत्या के पीछे किसका हाथ है?
बता दें कि खालिस्तानी संगठनों के इरादे अब भी भारत के खिलाफ ठीक नहीं हैं। कनाडा से बिगड़े रिश्तों के बीच अब खालिस्तानी संगठन सिख्स फॉर जस्टिस ने जी-7 देशों में किल इंडिया रैली के आयोजन का ऐलान किया है। इससे पहले भी इस तरह की रैलियों का ऐलान खालिस्तानियों ने किया था। पन्नू ने वीडियो जारी कर कहा कि 21 अक्टूबर को जी-7 देशों में भारतीय दूतावास के बाहर ये रैलियां निकाली जाएंगी। जी-7 देशों में कनाडा के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान और जर्मनी जैसे देश भी शामिल हैं।
भारत के खिलाफ रेफरेंडम भी करा रहे खालिस्तानी, 2025 तक प्लान
बता दें कि खालिस्तानियों ने पंजाब को लेकर रेफरेंडम का भी ऐलान किया है। खालिस्तानी 2020 से ही ऐसे रेफरेंडम करा रहे हैं और 2025 तक इसका प्लान है। दरअसल कनाडा में 2025 में आम चुनाव होने हैं। उससे पहले खालिस्तानी तत्व अपने एजेंडे पर सरकारी समर्थन हासिल करने के लिए रेफरेंडम का दबाव बनाते रहते हैं।
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