यूरोप तक जाने वाले IIMEC कॉरिडोर पर जंग के बीच ही काम शुरू, भारत दे रहा है 3.5 लाख करोड़
फिलहाल पश्चिम एशिया में इजरायल और हमास के बीच जंग से हालात बिगड़े हुए हैं तो वहीं भारत, अमेरिका और सऊदी अरब जैसे देश इन्फ्रास्ट्रक्चर के सेक्टर में नई मिसाल कायम करने में जुटे हैं।

एक तरफ पश्चिम एशिया में इजरायल और हमास के बीच जंग से हालात बिगड़े हुए हैं तो वहीं भारत, अमेरिका और सऊदी अरब जैसे देश इन्फ्रास्ट्रक्चर के सेक्टर में नई मिसाल कायम करने में जुटे हैं। भारत में जी-20 देशों की मीटिंग के दौरान इंडिया मिडल ईस्ट यूरोप इकनॉमिक कॉरिडोर को लेकर सहमति बनी थी। इसके मुख्य प्लेयर भारत, यूएई, सऊदी और अमेरिका माने जा रहे हैं। इन सभी देशों ने इस कॉरिडोर पर काम शुरू कर दिया है और भारत ने भी पश्चिमी तटों को रेलवे से जोड़ने के लिए 3.5 लाख करोड़ रुपये का बजट तय कर दिया है। इसके जरिए देश के पश्चिमी तटों पर स्थित बंदरगाहों को रेलवे के जरिए जोड़ा जाएगा।
इसके तहत यह प्लान है कि देश के किसी भी हिस्से से 36 घंटों के अंदर यहां माल पहुंच जाए और फिर उसे यूरोप तक इस गलियारे से पहुंचाया जाए। दरअसल पश्चिमी तटों पर माल पहुंचने के बाद उसे जहाज के जरिए यूएई के फुजैरा पहुंचाया जाएगा। फिर उन्हें ट्रेन से इजरायल के हाइफा रवाना किया जाएगा। माल के हाइफा पहुंचने के बाद उसे इटली के रास्ते यूरोप के अन्य देशों तक भेजा जाएगा। इटली के बाद फ्रांस और यूके तक सामान भेजा जा सकेगा। अमेरिका पहले ही इस गठबंधन का हिस्सा है।
यही नहीं ग्रीस और उत्तर अफ्रीका के देशों के बंदरगाहों में भी ट्रैफिक बढ़ सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी पिछले सप्ताह कहा था कि हमारे लिए यह प्रोजेक्ट अहम है। उन्होंने कहा, 'मिडल ईस्ट के लिए बेहतर भविष्य तैयार करने को अमेरिका और उसके साझीदार प्रतिबद्ध हैं। इस कॉरिडोर के जरिए दुनिया की टॉप अर्थव्यवस्थाएं जुड़ सकेंगी। इससे रोजागार बढ़ेगा, खर्मच में कमी होगी। इसके अलावा जब कनेक्टिविटी आपस में बढ़ जाएगी तो फिर युद्ध भी कम होंगे।' अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इससे मिडल ईस्ट को फायदा होगा तो अमेरिका के लिए भी बेहतर रहेगा।
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