मौत का जाल बना भारत का ये एक्सप्रेसवे, हर महीने जाती है 20 लोगों की जान; जानिए वजह
राजमार्ग पर दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल होने वाले लोगों की औसत संख्या हर महीने 100 के करीब थी। इस साल जनवरी और जून के महीनों के बीच एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं की कुल संख्या 512 थी।

बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेसवे पर सड़क दुर्घटनाओं में हर महीने औसतन 20 लोगों की जान चली जाती है। कर्नाटक सरकार ने बुधवार को विधान परिषद को यह जानकारी दी। राज्य सरकार ने कहा कि राजमार्ग पर दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल होने वाले लोगों की औसत संख्या हर महीने 100 के करीब थी। इस साल जनवरी और जून के महीनों के बीच एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं की कुल संख्या 512 थी। इनमें से 245 दुर्घटनाएं राजमार्ग के बेंगलुरु से निदघट्टा खंड पर हुईं, जबकि निदघट्टा से मैसूरु खंड पर 267 दुर्घटनाएं हुईं। कुल मौतों की संख्या 123 है। एक महीने में सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं मई में दर्ज की गईं जब 110 दुर्घटनाएं हुईं थीं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जनता दल (सेक्युलर) एमएलसी मारथिब्बेगौड़ा के एक सवाल के जवाब में लोक निर्माण विभाग मंत्री सतीश जारकीहोली ने सदन में डेटा साझा किया। निदघट्टा से मैसूरु के बीच की सड़क बेंगलुरु और निदघट्टा के बीच की तुलना में अधिक घातक बताई गई है। निदघट्टा से मैसूरु के बीच 267 दुर्घटनाएं, 66 मौतें और 304 गंभीर चोटें देखी गईं, जबकि बेंगलुरु से शुरू होने वाले खंड में अपेक्षाकृत कम दुर्घटनाएँ (245), कम मौतें (57), और गंभीर चोटों के कम मामले (287) पाए गए।
सरकार ने इन दुर्घटनाओं की वजह भी बताई है। इसने कहा कि "लेन अनुशासन की कमी और 100 किमी प्रति घंटे की स्पीड लिमिट से अधिक होना" दुर्घटनाओं का मुख्य कारण था। इसने कहा कि लोग लेन अपनी लेन के बजाय इधर-उधर ओवरटेक करने के चलते एक्सीडेंट का शिकार हो रहे हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एक्सप्रेसवे पर दोपहिया और तिपहिया वाहनों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया है।
सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़े अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (यातायात और सड़क सुरक्षा) आलोक कुमार द्वारा हाल ही में संकलित एक रिपोर्ट से अलग थे। कुछ दिन पहले जारी अपनी रिपोर्ट में, कुमार ने दुर्घटनाओं की संख्या 296 और मौतों की संख्या 132 आंकी थी। एक्सप्रेसवे का उद्घाटन इस साल मार्च में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।
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