Lalu Yadav Birthday Lalu fought PUSU president elections in 1973 by quitting job and playing gimmicks Congress surprised - India Hindi News नौकरी छोड़ और तिकड़मबाजी कर लालू यादव ने लड़ा था PUSU चुनाव, फिर ऐसी चमकी किस्मत; कांग्रेसी रह गए थे हैरान, India Hindi News - Hindustan
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नौकरी छोड़ और तिकड़मबाजी कर लालू यादव ने लड़ा था PUSU चुनाव, फिर ऐसी चमकी किस्मत; कांग्रेसी रह गए थे हैरान

Lalu Yadav Birthday: मुख्यमंत्री बनने तक लालू अपने बड़े भाई, जो पटना वेटरनिरी कॉलेज में चपरासी थे, के साथ उसी कॉलेज परिसर में रहते थे। सीएम बनने पर वह एक अन्ने मार्ग में शिफ्ट हुए थे।

Pramod Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीSun, 11 June 2023 01:01 PM
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नौकरी छोड़ और तिकड़मबाजी कर लालू यादव ने लड़ा था PUSU चुनाव, फिर ऐसी चमकी किस्मत; कांग्रेसी रह गए थे हैरान

Lalu Yadav Birthday: 1970 का दशक लालू यादव के जीवन के लिए काफी अहम रहा है। यह वही काल था, जब लालू की जिंदगी में राबड़ी देवी आईं और लालू पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए और फिर जेपी के अनन्य चेले बने। लालू ने इसी दौर में पिछड़े नेता के रूप में अपनी पहचान भी बनाई। हालांकि, लालू यादव को इसके लिए काफी संघर्ष, त्याग और तिकड़मबाजी भी करनी पड़ी।

रह चुके थे PUSU महासचिव
लालू यादव की गंभीर राजनीति में एंट्री 1970 के दशक के शुरुआत में ही हुई थी। उन्होंने 1970 में पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ (PUSU) के अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस उम्मीदवार से चुनाव हारने के बाद छात्र राजनीति छोड़ दी थी। हालांकि, इस चुनाव में हारने से पहले लालू तीन साल तक PUSU के महासचिव रह चुके थे। चुनाव हारने के कुछ महीनों बाद लालू यादव ने अपने बड़े भाई की मदद से पटना वेटरिनरी कॉलेज में नौकरी पकड़ ली थी।

तिकड़मबाजी कर बने थे PUSU अध्यक्ष
लालू के उत्थान और पतन को बारीकी से जानने वाले पत्रकार और लेखक सकर्षण ठाकुर ने अपनी किताब 'सबाल्टर्न साहिब: बिहार एंड द मेकिंग ऑफ लालू यादव' में लिखा है,  "1973 में पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के चुनावों में गैर-कांग्रेसी छात्रों का निकाय कांग्रेस उम्मीदवार को हराने के मकसद से एकजुट हो गए थे। लेकिन उन्हें संघ का नेतृत्व करने के लिए एक विश्वसनीय और ऊर्जावान पिछड़े वर्ग के उम्मीदवार की जरूरत थी। लालू यादव उस पैमाने में फिट थे लेकिन समस्या यह थी कि वह तब पटना विश्वविद्यालय के छात्र नहीं थे।" 

जैसा कि ठाकुर लिखते हैं, “यह सुनिश्चित करते हुए कि जातिगत अंकगणित कांग्रेस के खिलाफ है,तब लालू चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो गए। उन्होंने चुपचाप पटना वेटरनरी कॉलेज की अपनी नौकरी छोड़ दी और पटना लॉ कॉलेज में पिछली तारीख से दाखिला ले लिया। वह चुनाव में खड़े हुए और जीत गए। लालू के नेतृत्व में गैर-कांग्रेसी गठबंधन ने PUSU चुनावों में बाजी मार ली थी।”

1973 में मिली अलग पहचान
1973 की इस जीत ने लालू यादव को बड़ी लीग के लिए खड़ा कर दिया। इसी साल लालू यादव की राबड़ी देवी से शादी हुई। लालू के लिए यह शादी काफी लकी साबित हुई। यह वही समय था, जब दिग्गज नेता जय प्रकाश नारायण ने तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी और उनकी मनमानी के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था। 1974 में, गांधी के खिलाफ आंदोलन ने रफ्तार पकड़ ली थी और वह पूरे देश में फैल चुका था।

ठाकुर लिखते हैं, "जेपी ने तब एक आंदोलन समिति का गठन किया था, विभिन्न संघों की गतिविधियों के समन्वय के लिए बिहार छात्र संघर्ष समिति और PUSU के अध्यक्ष के रूप में लालू यादव को इसका प्रमुख चुना गया था।" इन घटनाओं ने लालू यादव को उस बड़ी लीग में पहुंचा दिया था, जहां से उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह 1977 में 29 वर्ष की बहुत कम उम्र में ही लोकसभा के सदस्य चुने गए। बाद में 1990 में लालू बिहार के मुख्यमंत्री बने। लालू पिछड़े वर्ग के नेता के रूप में शुमार हो चले थे।

चपरासी क्वार्टर में रहते थे लालू
मुख्यमंत्री बनने तक लालू अपने बड़े भाई, जो पटना वेटरनिरी कॉलेज में चपरासी थे, के साथ उसी कॉलेज परिसर में रहते थे। सीएम बनने पर वह एक अन्ने मार्ग में शिफ्ट हुए थे। हालांकि, मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए भी उन्हें पापड़ बेलने पड़े थे और देवीलाल की मदद से उन्होंने सियासी तिकड़म कर सत्ता संभाली थी।

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