आनंद मोहन की रिहाई पर भड़का IAS एसोसिएशन, बिहार सरकार से फैसला वापस लेने की मांग
तेलंगाना में जन्मे आईएएस अधिकारी कृष्णैया दलित समुदाय से थे। वह बिहार में गोपालगंज के जिलाधिकारी थे और 1994 में जब मुजफ्फरपुर जिले से गुजर रहे थे तभी भीड़ ने पीट-पीट कर उनकी हत्या कर दी थी।

IAS अधिकारी जी. कृष्णैया की हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा काट रहे बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सेंट्रल आईएएस एसोसिएशन ने बिहार सरकार के इस फैसले की निंदा की है। एसोसिएशन ने ट्वीट किया कि आनंद मोहन को रिहा करने का फैसला बहुत ही निराश करने वाला है। उन्होंने जी. कृष्णैया की नृशंस हत्या की थी। इसमें कहा गया, 'यह रिहाई दुखद है। बिहार सरकार को यह फैसला वापस लेना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो न्याय से वंचित होने के समान होगा। इस तरह के फैसलों से लोक सेवकों के मनोबल में गिरावट आती है। हम राज्य सरकार से अपील करते हैं कि बिहार सरकार जल्द से जल्द इस पर पुनर्विचार करे।'
दरअसल, आनंद मोहन राज्य की विभिन्न जेलों में 14 वर्ष से अधिक समय से बंद 26 अन्य कैदियों के साथ रिहा किए जाने वाले हैं। इस संबंध में सोमवार देर शाम अधिसूचना जारी की गई थी, जब आनंद मोहन अपने बेटे चेतन आनंद की सगाई के कार्यक्रम में थे, जो राज्य में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक हैं। आनंद मोहन अभी पैरोल पर जेल से बाहर हैं। उन्होंने संवाददाताओं से बात करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का आभार जताया, जो पटना के बाहरी इलाके में आयोजित कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के साथ शामिल हुए। आनंद मोहन ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती के नाम का जिक्र किए बगैर उन लोगों की आलोचना की, जो कृष्णैया की मौत को एक मुद्दा बना रहे हैं।
भीड़ ने पीट-पीटकर कर दी थी हत्या
तेलंगाना में जन्मे आईएएस अधिकारी कृष्णैया दलित समुदाय से थे। वह बिहार में गोपालगंज के जिलाधिकारी थे और 1994 में जब मुजफ्फरपुर जिले से गुजर रहे थे तभी भीड़ ने पीट-पीट कर उनकी हत्या कर दी थी। हत्या की घटना के वक्त आनंद मोहन मौके पर मौजूद थे, जहां वह दुर्दांत गैंगस्टर छोटन शुक्ला की शवयात्रा में शामिल हो रहे थे। शुक्ला की मुजफ्फरपुर शहर में गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। शुक्ला भूमिहार जाति से था, जबकि उससे सहानुभूति रखने वाले आनंद मोहन राजपूत जाति से आते हैं। वहीं कथित हत्यारे, ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) नेता बृज बिहारी प्रसाद से सहानुभूति रखने वाले बताये जाते हैं जो राबड़ी देवी सरकार में मंत्री थे, लेकिन कुछ वर्षों बाद (जून 1998 में) पटना के अस्पताल में उपचार कराने के दौरान गोली मार कर उनकी हत्या कर दी गई थी।
आनंद मोहन बोले- मेरी रिहाई पर शोरगुल करने वाले...
देहरादून में अपने बेटे की शादी में शरीक होने को उत्सुक आनंद मोहन ने कहा, 'इन वर्षों के दौरान अन्य लोग महज मूकदर्शक बने रहे। मेरी पत्नी लवली और जी कृष्णैया के परिवार ने पीड़ा सहन की। मुझे हैरानी है कि जेल से मेरी रिहाई पर शोरगुल कर रहे लोगों ने क्या कभी दिवंगत आईएएस अधिकारी के परिवार के सदस्यों के आंसू पोंछने की सोची।' पूर्व सांसद की कथित तौर पर रिहाई का मार्ग प्रशस्त करने के लिए नियमों में बदलाव किए जाने को लेकर मायावती के बिफरने के बाद भाजपा के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय की भी मिलती-जुलती प्रतिक्रिया देखने को मिली। जदयू अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन ने कहा, 'पहले अपनी 'बी' टीम (बसपा प्रमुख की ओर परोक्ष रूप से इशारा) को लगाने के बाद भाजपा आनंद मोहन की रिहाई के मुद्दे पर अब खुल कर सामने आ गई है।'
आनंद मोहन के अलावा ये होंगे रिहा
मालूम हो कि विधि विभाग की अधिसूचना, नियमों में हालिया संशोधन के बाद जारी की गई है, जिसमें सरकारी कर्मचारी/अधिकारी की हत्या या बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों के लिए दोषी ठहराए गए लोगों को 14 साल कैद की सजा पूरी करने के बाद भी रिहा नहीं किया जा सकता था। आनंद मोहन के अलावा, जिन अन्य लोगों की रिहाई का आदेश दिया गया है उनमें राजद के पूर्व विधायक राज वल्लभ यादव, जद(यू) के पूर्व विधायक अवधेश मंडल शामिल हैं। यादव को एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के मामले में दोषी ठहराया गया है, जबकि मंडल कई आपराधिक मामलों में नामजद है। मंडल की पत्नी बीमा भारती एक पूर्व मंत्री हैं।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
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