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पूरी दुनिया मान रही भारतीय हथियारों का लोहा, रक्षा निर्यात में रचा एक और कीर्तिमान

  • रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि देश के रक्षा निर्यात में पिछले साल की तुलना में 12 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। सरकार ने पिछले कुछ सालों में रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई नीतिगत सुधार किए हैं।

Jagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीTue, 1 April 2025 09:46 PM
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पूरी दुनिया मान रही भारतीय हथियारों का लोहा, रक्षा निर्यात में रचा एक और कीर्तिमान

रक्षा निर्यात के क्षेत्र में भारत रोजाना नए आयाम छू रहा है। इस बीच इस क्षेत्र से जुड़ी एक और खुशखबरी सामने आई है। सरकार ने मंगलवार को बताया है कि भारत ने रक्षा निर्यात के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत का रक्षा निर्यात 23,622 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। सरकार ने यह भी बताया है कि देश के रक्षा निर्यात में पिछले साल की तुलना में 12 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान भारत ने 80 से ज्यादा देशों में हथियारों की आपूर्ति की है।

रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया, "वित्तीय वर्ष 2024-25 में सार्वजनिक क्षेत्रों द्वारा निर्यात में 42.85% की वृद्धि हुई है। यह वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की बढ़ती स्वीकार्यता और ग्लोबल सप्लाई चेन में भारतीय रक्षा उद्योग की हिस्सा बनने की क्षमता को दर्शाता है।" आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान जहां निजी क्षेत्रों ने 15,233 करोड़ रुपये का योगदान दिया, वहीं सार्वजनिक क्षेत्र ने 8,389 करोड़ रुपये का योगदान दिया। पिछले साल इस अवधि में यह आंकड़ा क्रमशः 15,209 करोड़ रुपये और 5,874 करोड़ रुपये था। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि निर्यातकों की कुल संख्या में 17.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा देश

इस मौके कर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत 2029 तक रक्षा निर्यात को बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये करने के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा है कि भारत बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर सैन्य बल से विकसित होकर आत्मनिर्भरता और स्वदेशी उत्पादन पर अधिक जोर देने वाला देश बन गया है।

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भारत कैसे बन रहा अग्रणी?

गौरतलब है कि सरकार ने पिछले कुछ सालों में भारतीय रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई नीतिगत सुधार किए हैं। इनमें लाइसेंसिंग प्रक्रिया को आसान बनाना, लाइसेंस व्यवस्था से बिचौलियों को हटाना और निर्यात प्राधिकरण का सरलीकरण जैसे कदम शामिल हैं। वहीं सरकार ने रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए भी कई कदम उठाए हैं। इनमें कई तरह के हथियारों के आयात पर योजनाबद्ध तरीके से प्रतिबंध लगाना, स्थानीय रूप से निर्मित सैन्य हार्डवेयर खरीदने के लिए बजट का निर्माण, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को 49% से बढ़ाकर 74% करना जैसे उपाय शामिल हैं।