खुशखबरी! कश्मीर में भी दौड़ेगी वंदेभारत ट्रेन, पीएम मोदी दिखाएंगे इलेक्ट्रिक ट्रेन को हरी झंडी
कश्मीर घाटी में भी जल्द ही वंदेभारत ट्रेन का ऐलान हो सकता है।फिलहाल पीएम मोदी 20 फरवरी को कश्मीर घाटी में पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन को हरी झंडी दिखाने जा रहे हैं।

कश्मीर घाटी में पहली बार इलेक्ट्रिक ट्रेन दौड़ने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 फरवरी को कश्मीर की पहली इलेक्टिक ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। हाल ही में बनिहाल से संगलदन (रामबन के जिला मुख्यालय) तक रेलवे रूट का काम पूरा हुआ है। अब इस 48 किलोमीटर के रास्ते पर इलेक्ट्रिक ट्रेन दौड़ेगी। अधिकारियों का कहना है कि रूट पर जल्द ही वंदेभारत का भी ऐलान हो सकता है। बता दें कि जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटने के बाद इस क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार जनसभा को संबोधित करेंगे।
रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि रेलवे एक नया इतिहास लिखने जा रहा है। घाटी में अब क्लीन फ्यूल के जरिए ट्रेन चलेगी। अगले सप्ताह 2000 प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया जाएगा। इसमें कम से कम 500 रेलवे स्टेशनों का सुधार, रेलवे ब्रिज और अंडर ब्रिज का निर्माण शामिल है। चुनावी आचार संहिता लागू होने से पहले दो बड़े कार्यक्रम होने वाले हैं। वहीं अधिकारियों को भरोसा है कि जम्मू से श्रीनगर तक ट्रेन लोकसभा चुनाव से पहले ही दौड़ने लगेगी। सरकार ने वादा किया था कि घाटी को ट्रेन के जरिए जोड़ा जाएगा। बता दें कि संगलदन और कटरा के बीच दो सुरंगों को बनाने में देरी की वजह से इसका काम 6 महीने की देरी से पूरा हो रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि दुग्गा और रियासी के बीच 18 किलोमीटर का रूट पूरा हो गया है। हालांकि जब तक दोनों तरफ का काम खत्म नहीं हो जाता इसपर ट्रेन नहीं चलाई जा सकती। उन्होंने कहा, हमें भरोसा है कि जुलाई-अगस्त में जम्मू और कश्मीर के बीच ट्रेन सेवा शुरू हो जाएगी। जो सुरंगें बनाई जा रही हैं वे काफी जटिल हैं। ऐसे में काम पूरा होने में समय लग रहा है। फिलहाल बारामुला-बनिहाल सेक्शन में 138 किलोमीटर में डीजल ट्रेन चलती है। इस सेक्शन के इल्केट्रिफिकेशन का काम भी 470 करोड़ की लागत से पूरा हो चुका है। इस सेक्शन में 19 स्टेशन होंवगे।
शुरू हो सकती है वंदेभारत सेवा
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक एक रेलवे अधिकारी ने कहा, इलेक्ट्रिफिकेशन के बाद इस रूट पर जल्द ही वंदेभारत भी दौड़ सकती है। यह उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक प्रोजेक्ट का हिस्सा है। यहां सबसे ज्यादा चुनौती पीर पंजाल पर्वत श्रेणी में सुरंग बनाने की है जिसका इस्तेमाल हर मौसम में किया जा सके। वहीं यहां आर्थिक गतिविधियां तेज करने के लिए भी रूट को संचालित करने की जरूरत है। इस रूट के कुल 272 किलोमीटर के प्रोजेक्ट में से 161 किलोमीटर का रूट अब तक कमीशन हुआ है।
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