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भारत के दोस्त ईरान पर चीन का असर बढ़ा, तेल खरीद तिगुना; अब काट को पहुंचे जयशंकर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ईरान के दौरे पर पहुंचे हैं। यह विजिट अहम है क्योंकि बीते कुछ महीनों में ईरान पर चीन का असर तेजी से बढ़ी है। चीन की तेल खरीद उससे तीन गुना तक बढ़ गई है, जो टेंशन की बात है।

Surya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, तेहरान नई दिल्लीMon, 15 Jan 2024 11:08 AM
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भारत के दोस्त ईरान पर चीन का असर बढ़ा, तेल खरीद तिगुना; अब काट को पहुंचे जयशंकर

भारत के दोस्त और चाबहार जैसी परियोजनाओं में सहयोगी ईरान पर बीते कुछ महीनों में चीन का असर तेजी से बढ़ा है। इसकी एक वजह यह भी है कि चीन ने ईरान से तेल की खरीद को तीन गुना तक बढ़ा दिया है, जबकि भारत की खरीद कम हो गई है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भी चीन का खरीद जारी रखना ईरान के लिए अहम साबित हुई है और इसके चलते वह चीन के करीब आया है। हालांकि भारत के लिए यह स्थिति असहज हो सकती है। ऐसे में उसने ईरान को एक बार फिर से अपने पाले में लाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर दो दिनों के ईरान दौरे पर हैं। इस दौरान वह तेल खरीद, इजरायल हमास युद्ध समेत कई अहम मसलों पर बात करेंगे।

एस. जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष हुसैन आमिर-अब्दुल्लाहियान क्षेत्रीय मसलों, द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक मामलों पर बात करेंगे। भारत ने पिछले कुछ समय में ईरान से तेल खरीद कम कर दी है, जबकि चीन उसका बड़ा ग्राहक बन गया है। उसकी तेल खरीद 2020 से 2023 आते-आते तीन गुना तक बढ़ गई है। इसके अलावा इजरायल और हमास के बीच जारी जंग में भी भारत और ईरान अलग-अलग पाले में दिख रहे हैं। वहीं चीन का स्वर ईरान से मेल खा रहा है। यह स्थिति भी ऐसी है, जिस पर जयशंकर ईरान से संवाद स्थापित करना चाहेंगे। 

इस मीटिंग में चाबहार पोर्ट के विकास को लेकर भी बात होगी। यह दोनों देशों के बीच कारोबार के लिए बड़ा लिंक है और इसके जरिए ईरान एवं भारत को अफगानिस्तान तक पहुंचने में मदद मिलती है। यही नहीं 7200 किलोमीटर लंबे नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के लिए भी यह अहम है। इसके जरिए भारत ईरान, अफगानिस्तान, अरमेनिया, अजरबैजान, रूस, सेंट्रल एशिया और यूरोप तक जुड़ जाता है। उसका गेटवे चाबहार पोर्ट ही है। इस लिहाज से इस पर तेजी से काम होना जरूरी है। 

चर्चा यह भी है कि इस मीटिंग में लाल सागर में हूती विद्रोहियों की ओर से जहाजों पर हमले को लेकर भी बात होगी। हूती विद्रोहियों के पीछे भी ईरान का समर्थन माना जाता है। ऐसे में उसे लेकर भी भारत करना चाहेगा कि कम से कम उसके जहाजों के लिए कोई बाधा न रहे। हाल ही में यमन में अमेरिका और ब्रिटेन ने हूती विद्रोहियों पर हमले किए थे। गौरतलब है कि इन हमलों के मद्देनजर भारत ने पहले ही अपने युद्धक जहाजों को बड़ी संख्या में तैनात कर दिया है।

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