सिजेरियन प्रसव को लेकर स्प्रिट से कैटगट तक खरीद रहे मरीज
धनबाद, अमित रंजन। धनबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में दूर-दराज की महिलाएं नि:शुल्क प्रसव की उम्मीद लेकर ´पहुंची हैं,...

धनबाद, अमित रंजन। धनबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में दूर-दराज की महिलाएं नि:शुल्क प्रसव की उम्मीद लेकर ´पहुंची हैं, लेकिन यहां उन्हें लाभ नहीं मिल पाता है। खासकर सिजेरियन प्रसव में कोई लाभ नहीं मिलता है। जिन गर्भवती की सिजेरियन डिलीवरी होती है, उन्हें स्प्रिट से लेकर कैटगट जैसे आइटम भी खुद खरीद कर लाने पड़ते हैं। तब उनकी डिलीवरी कराई जाती है। इन आइटम में उनके 25 सौ से तीन हजार रुपए तक खर्च होते हैं। स्थिति यह है कि बेहोशी का इंजेक्शन भी परिजनों से ही मंगवाया जाता है। बता दें कि सरकार के निर्देशानुसार सरकारी चिकित्सीय संस्थानों में गर्भवतियों का नि:शुल्क प्रसव करवाया जाना है। यानी उनका एक रुपया भी खर्च नहीं होना है। इसके लिए अस्पताल की अपनी व्यवस्था के साथ जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (जेएसएसके) चल रहे हैं। स्वास्थ्य सुविधाएं अस्पताल की चौखट पर आकर दम तोड़ देती हैं। महिलाओं को उसका लाभ नहीं मिलता। सिजेरियन प्रसव के लिए नर्स मरीज के परिजन को पर्ची थमाती हैं और मरीज उसे बाहर से खरीद कर लाते हैं।
अस्पताल में दो वर्षों से किल्लत: अस्पताल कर्मियों की मानें तो जेएसएसके के तहत सरकार ने सर्जिकल आईटम की खरीद पर रोक लगा दी है। इस कारण योजना से आपूर्ति नहीं हो रही है। अस्पताल की ओर से भी आपूर्ति बंद है। बीते दो वर्षों से मरीज के परिजन बाजार से खरीद कर लाते हैं। तब सिजेरियन डिलीवरी कराई जाती है।
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