संभल मस्जिद में रंगाई-पुताई की मांग मंदिर के साक्ष्य छुपाने की कोशिश, अधिवक्ता विष्णु जैन का आरोप
वाराणसी की ज्ञानवापी से लेकर संभल की जामा मस्जिद तक केस लड़ रहे हिंदू पक्ष के अधिवक्ता ने मुस्लिम पक्ष पर बड़ा आरोप लगाया है। विष्णु जैन ने संभल की जामा मस्जिद में रंगाई पोताई की मांग वाली याचिका को मंदिर के साक्ष्य छिपाने की कोशिश बताया है।
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संभल की शाही जामा मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद में हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने आरोप लगाया है कि मस्जिद में रंगाई-पुताई का मुद्दा महज बहाना है। दूसरा पक्ष मंदिर होने के साक्ष्यों को छुपाना चाहता है। शुक्रवार को अधिवक्ता जैन आयोग के समक्ष बयान दर्ज कराने पहुंचे थे। 24 नवंबर की हिंसा को लेकर लगाए गए ‘जय श्री राम’ के नारे के आरोपों को उन्होंने पूरी तरह गलत करार दिया। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर किसी के पास इसका कोई वीडियो प्रमाण है तो उसे सामने लाया जाए।
अधिवक्ता जैन ने कहा कि 24 नवंबर के बाद से लगातार उन्हें धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने इन धमकियों के साक्ष्य पुलिस प्रशासन को सौंप दिए हैं, जिस पर जांच जारी है। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 मार्च की तिथि तय की है। जैन ने कहा कि यह मामला अपने निष्कर्ष तक पहुंचे, जिससे हरिहर मंदिर होने का सच सबके सामने आएगा। जैन ने दावा किया कि संभल का सच यही है कि वो पूर्व में हरिहर मंदिर था। जिसको मस्जिद की आकार दिया गया। यह एएसआई द्वारा संरक्षित भवन है।
विवादित स्थल पर एएसआई का होना चाहिए नियंत्रण
विष्णु शर्मा का कहना है कि हिंसा में मारे गए लोगों को ‘शहीद’ कहना गलत है। इसे गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जमीयत उलेमा हिंद भारत की अस्मिता को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहा है, और सरकार उनकी फंडिंग की जांच कर रही है।
अधिवक्ता विष्णु शर्मा ने बताया कि उन्होंने आयोग के समक्ष अपना शपथ पत्र जमा किया है, जिसमें उन्होंने 19 नवंबर को हुए सर्वे के दौरान की स्थिति का विवरण दिया। उनके अनुसार, सर्वे के दिन विधायक के पुत्र और सांसद के साथ 200 से 300 लोग वहां पहुंचे थे। 24 नवंबर को सर्वे के दौरान शोर शराबा, गोलियों की आवाज व उठने धुएं से हिंसा का पता चला।
उन्होंने आरोप लगाया कि मस्जिद कमेटी एएसआई को अंदर जाने नहीं देती थी, जबकि 2018 में कमेटी द्वारा किए गए बदलावों को लेकर पहले ही एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि विवादित स्थल 1920 से एएसआई द्वारा संरक्षित है, इसलिए सैद्धांतिक रूप से वहां की सभी गतिविधियां एएसआई की निगरानी में होनी चाहिए। शर्मा ने आगे कहा कि एएसआई को इस स्थल की मरम्मत का अधिकार दिया जाना चाहिए और मस्जिद कमेटी ने इस पर अवैध कब्जा कर रखा है। उनका कहना है कि यह स्थल पूरी तरह एएसआई के अधिकार क्षेत्र में आना चाहिए।
वहीं, संभल के जिलाधिकारी डा. राजेंद्र पैंसिया के बताया कि दो दिवसीय दौरे पर चौथी बार आई न्यायिक जांच आयोग की टीम ने पहले दिन 29 लोगों के बयान दर्ज किए हैं। जिसमें स्थानीय, चिकित्सक व अधिकारी गण शामिल रहे। एएसआई ने अपना शपथ पत्र हाईकोर्ट में दिया है। हाइकोर्ट से मिले निर्देश के बाद कार्रवाई की जाएगी।
त्यौहारों के लिए थाने, तहसील व जनपद स्तर पर पीस कमेटी की बैठके हो गई है। त्यौहार शांति, सुरक्षा, सौहार्द व समन्वय के रूप में मनाया जाएगा। अगर किसी प्रकार की शिकायत व उकसावे को लेकर रिपोर्ट आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विवादित स्थल एएसआई की प्रोपर्टी है। एएसआई जब भी हमसे सहयोग मांगेगा हम हमेशा देने को तैयार है।