ज्ञानवापी मस्जिद से सटी शृंगार गौरी का दर्शन करने उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, मुक्ति के लगे नारे
वाराणसी काशी विश्वनाथ मंदिर से सटी ज्ञानवापी मस्जिद के पश्चिमी दीवारा पर स्थित शृंगार गौरी के दर्शन पूजन के लिए बुधवार को भीड़ उमड़ पड़ी। साल में केवल एक बार चैत्र नवरात्र की चतुर्थी पर ही यहां दर्शन की अनुमति है।

वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर से सटी ज्ञानवापी मस्जिद के पश्चिमी द्वार पर स्थित शृंगार गौरी मंदिर में दर्शन के लिए बुधवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान मंदिर की मुुक्ति के लिए नारा भी लगा। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद से प्रशासन ने इस मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना पर रोक लगा दी थी। पूजा दोबारा शुरू करने के लिए कोर्ट में मामला भी चल रहा है। फिलहाल श्रद्धालुओं को साल में केवल एक बार चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन ही यहां पूजा करने की अनुमति है।
पांच महिलाओं के एक समूह ने 2021 में मंदिर में नियमित पूजा की अनुमति के लिए कोर्ट में याचिका दायर की है। मामला अब भी अदालत में विचाराधीन है। ज्ञानवापी केस दायर करने वाली 4 महिलाओं और वकील विष्णुशंकर जैन भी दर्शन करने पहुंचे। इस दौरान विष्णुशंकर जैन ने कहा कि कोर्ट में हमारी जीत हो, मां से ऐसी कामना की है। सत्यनारायण मंदिर और विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर 4-बी से सुबह 8.30 बजे श्रद्धालुओं की एंट्री कराई गई। दोपहर 12 बजे तक श्रद्धालुओं ने दर्शन किया।
महिलाओं के समूह के साथ पूजा-अर्चना करने आईं गुलशन कपूर ने कहा कि श्रद्धालुओं को साल में एक बार चैत्र नवरात्रि के दौरान मंदिर में सामूहिक पूजा करने का अधिकार दिया गया है। कपूर ने कहा कि बुधवार को श्रद्धालुओं को मां शृंगार गौरी की पूजा-अर्चना करने का दुर्लभ अवसर मिला। महिला श्रद्धालुओं ने अनुष्ठान के तहत वैवाहिक सुख की प्रतीक पारंपरिक वस्तुएं और नारियल चढ़ाए। कपूर ने कहा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना पर प्रशासनिक प्रतिबंध लगा दिए गए थे।
गंगा जल लेकर निकला जत्था
दर्शन के लिए सुबह ज्ञानवापी मुक्ति महापरिषद के बैनर तले श्रद्धालुओं का जत्था गंगा से जल लेकर निकला। रास्ते भर श्रद्धालु भक्ति गानों पर झूमते रहे। हर-हर महादेव के जयकारे लगे। शंखनाद और डमरू वादन हुआ। कड़ी सुरक्षा के बीच श्रद्धालुओं की एंट्री कराई गई।