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महिला रिजर्वेशन बिल चुनावी जुमला, कोटे के अंदर कोटा होगा तो विरोध नहीं करेंगे: जेडीयू

जेडीयू ने कहा कि महिला रिजर्वेशन बिल के विरोध करने का कोई कारण नहीं है। पार्टी ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि वह राष्ट्रवार जाति जनगणना की मांग कर रही है।

Himanshu Tiwari सुनेत्रा चौधरी, हिन्दुस्तान टाइम्स, नई दिल्लीTue, 19 Sep 2023 12:25 PM
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महिला रिजर्वेशन बिल चुनावी जुमला, कोटे के अंदर कोटा होगा तो विरोध नहीं करेंगे: जेडीयू

महिला आरक्षण विधेयक को लेकर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने अलग ही रुख अपनाते हुए इसे चुनावी जुमला बताया है। जेडीयू ने कहा कि यदि 'कोटा के अंदर कोटा' का आरक्षण होता तो हम इसका सपोर्ट करते। पार्टी ने कहा कि इसका विरोध करने का कोई कारण नहीं है। पार्टी ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि वह राष्ट्रवार जाति जनगणना की मांग कर रही है।

महिला आरक्षण विधेयक के बारे में बात करते हुए जेडीयो के रंजन उर्फ ​​ललन सिंह ने हिन्दुस्तान टाइम्स से बातचीत की। उन्होंने कहा, "हम राष्ट्रवार जाति जनगणना की मांग कर रहे हैं, इसलिए यदि जनसंख्या का उचित प्रतिनिधित्व नहीं है तो आरक्षण का क्या मतलब है। आरक्षण एक समुदाय का मुद्दा उठाने के लिए किया जाता है। ओबीसी, ईबीसी की तरह उनकी भी आबादी है और इसीलिए हम जाति जनगणना के बारे में जोर दे रहे हैं। इसे (महिला आरक्षण विधेयक) आखिरी दिन लाने का क्या फायदा? तो फिर यह एक चुनावी जुमला है।''

2014 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान और 2019 में अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान भी इस पर चुप रहने के लिए भाजपा पर निशाना साधते हुए सिंह ने कहा, "नौ साल से महिला आरक्षण विधेयक एक मुद्दा था। अगर बिल में कोटा के भीतर कोटा होगा तो हम समर्थन करेंगे।"

नीतीश कुमार की जेडीयू ने पहले इस बिल का विरोध किया था। साल 2010 में नीतीश ने इसका समर्थन किया जिसके बाद तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष शरद यादव के साथ उनका मतभेद हो गया। जेडीयू ने कांग्रेस और कई अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर प्रधानमंत्री से इसे विशेष सत्र में पेश करने की मांग की थी।

जहां कांग्रेस और वामपंथी दल इस विधेयक का समर्थन करते हैं, वहीं लालू यादव की राजद और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी जैसे प्रमुख घटक हमेशा से इसके मौजूदा स्वरूप का विरोध करते रहे हैं। उन्होंने 33 प्रतिशत कोटे के भीतर पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए कोटा की मांग करते हुए विधेयक का जमकर विरोध किया है।

महिला आरक्षण विधेयक बन सकता है इंडिया गुट के लिए रोड़ा
2010 में जब राज्यसभा ने बिल पास किया तो इन विपक्षी पार्टियों ने लोकसभा में इसे रोक दिया। इस बिल पर सपा और राजद ने सत्तारूढ़ यूपीए सरकार से समर्थन भी वापस ले लिया। सीट-बंटवारा पहले से ही इंडिया गुट के लिए एक बड़ा सिरदर्द बनता जा रहा है, महिला आरक्षण बिल पर मतभेद 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले विपक्षी एकता की और परीक्षा लेगा।

कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने मंगलवार को कहा कि महिला आरक्षण विधेयक ''हमारा ही'' है। आज संसद में प्रवेश करते समय जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "यह हमारा है, अपना है।" 27 साल पहले एचडी देवेगौड़ा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा पेश किया गया यह विधेयक पांचवीं बार संसद में पेश किया जाएगा।

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