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सत्ता में रहकर भी क्यों विपक्ष की मंजूरी के मोहताज हैं मुइज्जू, कैसे चलती है मालदीव की सरकार

मालदीव की संसद में इन दिनों घमासान मचा हुआ है। मामला मुइज्जू की कैबिनेट में चार सदस्यों को शामिल करने का है। इसे लेकर संसद में हाथापाई तक हो गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

Deepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान, मालेMon, 29 Jan 2024 03:15 PM
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सत्ता में रहकर भी क्यों विपक्ष की मंजूरी के मोहताज हैं मुइज्जू, कैसे चलती है मालदीव की सरकार

मालदीव की संसद में इन दिनों घमासान मचा हुआ है। मामला मुइज्जू की कैबिनेट में चार सदस्यों को शामिल करने का है। इसको लेकर संसद में हाथापाई तक हो गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। असल में यहां पर विपक्ष ने मुइज्जू की कैबिनेट में चार सदस्यों के शामिल होने पर पेच फंसा दिया है। अब आप सोच रहे होंगे कि जब सदस्यों को सरकार में शामिल करना है तो विपक्ष की सहमति से क्या लेना-देना? आइए आपको बताते हैं क्या पूरा माजरा और कैसे सत्ता में होने के बावजूद विपक्ष की मंजूरी के मोहताज हैं मुइज्जू...

ऐसा है सिस्टम
असल में मालदीव का सिस्टम भारत से पूरी तरह से अलग है। यहां पर प्रेसिडेंशियल रिप्रजेंटेटिव सिस्टम चलता है और सरकार का मुखिया होता है राष्ट्रपति। राष्ट्रपति को अगर अपने कैबिनेट में कोई नियुक्ति करनी है तो उसे संसद से इजाजत लेनी होती है। यहां की संसद पीपुल्स मजलिस कही जाती है, जिसके सदस्य हर पांच साल के बाद चुने जाते हैं। यहां पर आम चुनाव के जरिए मजलिस के सदस्यों को चुना जाता है। 18 दिसंबर 2023 से मालदीव की मजलिस में कुल 80 सदस्य हैं। इससे पूर्व यहां पर 87 सदस्य होते थे। 

यहां फंस रहा पेच
इसी तरह राष्ट्रपति का चुनाव भी सीधे जनता ही करती है। हर पांच साल पर राष्ट्रपति का चुनाव होता है। जिस उम्मीदवार को 50 फीसदी से ज्यादा वोट मिलते हैं, वह राष्ट्रपति बनता है। पिछला चुनाव साल 2023 में हुआ था, जिसमें मोहम्मद मुइज्जू ने 54 फीसदी वोट पाकर इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को मात दी थी। मालदीव में फिलहाल पीपीएम और पीएनसी गठबंधन की सरकार है। वहीं, बहुमत विपक्षी दल एमपीडी का है। अब मोइज्जू कैबिनेट में चार सदस्यों को शामिल करना चाहते हैं। इसके लिए उन्हें संसद से मंजूरी चाहिए। लेकिन चूंकि विपक्ष बहुमत में है, इसलिए वह मंजूरी नहीं दे रहा। 

तब बढ़ेगी मुइज्जू की मुश्किल
मालदीव में इसी साल 17 मार्च को फिर से मजलिस के चुनाव यानी राष्ट्रपति चुनाव होंगे। अगर मुइज्जू को आसानी से सरकार चलानी है तो फिर उनकी पार्टी को इन चुनावों में जीत हासिल करनी ही होगी। क्योंकि अगर फिर से विपक्ष ने मजलिस के चुनाव में जीत दर्ज की तो फिर मुइज्जू के लिए मालदीव की सरकार चलाना बहुत ज्यादा मुश्किल हो जाएगा। क्योंकि बहुमत में होने के चलते वह सरकार के प्रस्तावों में अड़ंगेबाजी करता रहेगा और मुइज्जू परेशान होते रहेंगे। 

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