बैंकों से अचानक पैसे निकालने की मची है होड़, SBI समेत बड़े बैंकों की बढ़ी टेंशन
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) जैसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए चालू और बचत खाता अनुपात (CASA) में गिरावट ने टेंशन बढ़ा दी है।

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) जैसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए चालू और बचत खाता अनुपात (CASA) में गिरावट ने टेंशन बढ़ा दी है। ये बैंक कम लागत वाली जमाओं की हिस्सेदारी में गिरावट के बाद अपने CASA को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं। एसबीआई अधिक चालू खाते खोलने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। हालांकि, एसबीआई के चेयरमैन दिनेश खारा ने कहा कि बैंक CASA में सुधार के लिए अपनी बचत जमा दरों में संशोधन नहीं कर रहा है।
चालू खातों को बढ़ाने पर जोर
एसबीआई चालू खातों को बढ़ाने पर विचार कर रहा है और एक साल पहले से चालू खातों में 8% की वृद्धि देख रहा है। खारा ने कहा कि छह महीने पहले एसबीआई ने पूरे भारत में लेनदेन बैंकिंग केंद्र शुरू किए जिससे चालू खातों में वृद्धि हुई। अपने कुछ प्रतिस्पर्धियों की तरह एसबीआई ने भी सितंबर तिमाही में ग्रॉस CASA अनुपात में गिरावट देखी। सितंबर के अंत में एसबीआई का CASA 41.8% था, जबकि एक साल पहले यह 44.63% था।
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एसबीआई ने सितंबर तिमाही के दौरान मुनाफे में सालाना 8% की वृद्धि दर्ज की और यह 14,330 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, तिमाही आधार पर प्रॉफिट और परिचालन लाभ क्रमशः 15% और 23% गिरा है। प्रॉफिट में यह गिरावट वेतन संशोधन के लिए बढ़े हुए प्रावधान जैसे कारणों की वजह से हुई थी। एसबीआई चेयरमैन खारा ने कहा कि बैंक असुरक्षित ऋण देने में सहज है क्योंकि इसका उद्देश्य ज्यादातर वेतनभोगी कर्मचारी हैं। एसबीआई असुरक्षित ऋणों में 15-16% की वृद्धि की उम्मीद कर रहा है।
बैंक ऑफ बड़ौदा का CASA
बैंक ऑफ बड़ौदा अपने CASA को 39.6% से बढ़ाकर 41% करने पर विचार कर रहा है। हम CASA पर कई प्रोत्साहन दे रहे हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा का प्रॉफिट सालाना आधार पर 28.4% बढ़कर ₹4,253 करोड़ हो गया। शुद्ध ब्याज मार्जिन में 27 आधार अंकों की गिरावट के साथ 3.07% होने के बावजूद बीओबी ने उम्मीद से बेहतर मुनाफा कमाया।
जमा होने वाली रकम में कमी
बीते दिनों उद्योग मंडल फिक्की और भारतीय बैंक संघ (IBA) द्वारा जारी एक सर्वे रिपोर्ट में भी कहा गया था कि CASA में जमा होने वाली रकम में कमी आई है। बैंक जो पैसा जुटाते हैं, उसमें चालू और बचत खाता में जमा रकम कम लागत वाली राशि है। इन खातों में अधिक जमा राशि का मतलब बैंकों के लिए बेहतर मार्जिन है।
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