डिफेंस कंपनी को मिला ₹1,600 करोड़ का आर्डर, आज शेयर दिखाएंगे कमाल
Mazagon Dock Shipbuilders: सरकारी डिफेंस कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स भारतीय तट रक्षकों के लिए लगभग ₹1,600 करोड़ में छह जहाजों का निर्माण करेगी। ऑर्डर की घोषणा से पहले शेयर ₹2,046.25 पर बंद हुए।
सार्वजनिक क्षेत्र की डिफेंस कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स और कोचीन शिपयार्ड को रक्षा मंत्रालय से बुधवार को ही नए कांट्रैक्ट आर्डर मिले हैं। आज इन दोनों सरकारी कंपनियों के शेयर फोकस में रहेंगे। दरअसल ऑर्डर मिलने की घोषणा बुधवार को शेयर बाजार बंद होने के बाद हुई। ऑर्डर की घोषणा से पहले बुधवार को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स के शेयर बीएसई पर 4.44 प्रतिशत गिरकर ₹2,046.25 पर बंद हुए। जबकि, बीएसई पर कोचीन शिपयार्ड के शेयर 6.34 प्रतिशत गिरकर ₹1,223.95 पर बंद हुए।
नियामक फाइलिंग में डॉक शिपबिल्डर्स ने कहा कि वह भारतीय तट रक्षकों के लिए लगभग ₹1,600 करोड़ में छह जहाजों का निर्माण करेगा, जबकि कोचीन शिपयार्ड ने कहा कि उसने रक्षा मंत्रालय के साथ ₹488.25 करोड़ के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स को ₹1,600 करोड़ का ऑर्डर
कंपनी ने कहा कि उसने अगली पीढ़ी के छह अपतटीय गश्ती जहाजों के निर्माण और वितरण के लिए रक्षा मंत्रालय के अधिग्रहण विंग के साथ एक कांट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए हैं। खरीदे जा रहे छह जहाजों में से चार मौजूदा पुराने अपतटीय गश्ती जहाजों की जगह लेंगे और अन्य दो आईसीजी के बेड़े में वृद्धि करेंगे। पहला जहाज रक्षा मंत्रालय द्वारा एडवांस पेमेंट जारी होने की तारीख से 41 महीने (तीन साल पांच महीने) में और बाद के जहाजों को पांच महीने के अंतराल पर वितरित किया जाएगा।
इन जहाजों की क्या है खासियत
रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "ये आधुनिक और उच्च तकनीक वाले जहाज निगरानी, कानून प्रवर्तन, खोज और बचाव, समुद्री प्रदूषण प्रतिक्रिया और मानवीय सहायता सहित अन्य महत्वपूर्ण क्षमताओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।" इसमें कहा गया है कि कई उच्च तकनीक उन्नत सुविधाओं और उपकरणों के साथ ये गश्ती जहाज बहुउद्देशीय ड्रोन, एआई क्षमताओं और वायरलेस से नियंत्रित रिमोट वॉटर रेस्क्यू क्राफ्ट लाइफबॉय से लैस होंगे।
कोचीन शिपयार्ड को रक्षा मंत्रालय से आदेश: कोचीन शिपयार्ड द्वारा प्राप्त ऑर्डर के वर्क पैकेज में नौसेना पोत पर उपकरण और सिस्टम की मरम्मत और रखरखाव शामिल है। कंपनी ने कहा कि रक्षा मंत्रालय से आवश्यकता की मंजूरी के आधार पर वित्त वर्ष 2024 की दूसरी तिमाही के दौरान इस पर काम शुरू हो चुका है और वित्त वर्ष 2025 की पहली तिमाही तक पूरा होने की उम्मीद है।
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