एचडीएफसी बैंक के शेयर में तीन साल की सबसे बड़ी गिरावट
HDFC Bank Share: एचडीएफसी बैंक में पिछले तीन साल की सबसे बड़ी गिरावट है। कंपनी का मार्केट कैप एक लाख करोड़ रुपये से अधिक नीचे आ गया। कंपनी ने मंगलवार को तीसरी तिमाही नतीजे जारी किए थे।
शेयर मार्केट में बुधवार को आई गिरावट में सबसे अधिक हाथ एचडीएफसी बैंक का रहा। सेंसेक्स की कंपनियों में एचडीएफसी बैंक का शेयर 8 प्रतिशत से अधिक नीचे आ गया। यह पिछले तीन साल की सबसे बड़ी गिरावट है। कंपनी का मार्केट कैप एक लाख करोड़ रुपये से अधिक नीचे आ गया। कंपनी ने मंगलवार को तीसरी तिमाही नतीजे जारी किए थे। निफ्टी और बैंक निफ्टी की गिरावट में एचडीएफसी बैंक का योगदान करीब 50 फीसदी रहा। इसके अलावा, बैंकों में कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई और इंडसइंड बैंक नुकसान में रहे।
दो दिन में 5.73 लाख करोड़ डूबे: शेयर बाजार में भारी गिरावट से निवेशकों को 4.59 लाख करोड़ रुपये की चपत लगी। बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 4,59,327.64 करोड़ रुपये घटकर 3,70,35,933.18 करोड़ रुपये रह गया। बाजार में दो दिनों की गिरावट में निवेशकों की संपत्ति 5,73,576.83 करोड़ रुपये घट गई है। बीएसई मिडकैप 1.09 प्रतिशत लुढ़क गया, जबकि स्मॉलकैप 0.90 प्रतिशत नीचे आया।
डेढ़ साल में सबसे बड़ी गिरावट: हाल में शेयर बाजार में तेजी के बाद यह भारी गिरावट आई है। पिछले डेढ़ साल से अधिक समय में यह सेंसेक्स में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। सेंसेक्स करीब 2.23 प्रतिशत और निफ्टी 2.09 प्रतिशत तक लुढ़क गया। इससे पहले 13 जून 2022 को सेंसेक्स में 2.68 फीसदी और निफ्टी 2.64 प्रतिशत की गिरावट आई थी।
विदेशी निवेशकों की मुनाफा वसूली: कमजोर संकेतों को देखते हुए विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने बुधवार को जमकर मुनाफावसूली की और 10,578 करोड़ मूल्य के शेयर बेच दिए। इससे पहले जनवरी के पहले दो सप्ताह में एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजारों में करीब 3,900 करोड़ रुपये लगाए थे। दिसंबर में निवेश का आंकड़ा 66,134 करोड़ रुपये था।
इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा गिरावट
- बैंकिंग 4.02 प्रतिशत
- वित्तीय सेवाएं 3.76 प्रतिशत
- धातु 2.86 प्रतिशत
- कमोडिटीज 2.31 प्रतिशत
- टेलीकॉम 1.94 प्रतिशत
- यूटिलिटीज 1.03 प्रतिशत
- तेल एवं गैस 0.93 प्रतिशत
मार्केट में गिरावट के चार कारण
- आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, विभिन्न कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजे
- वैश्विक बाजारों में कमजोर संकेत मिलना
- विदेशी निवेशकों की जोरदार मुनाफा वसूली
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत दर में कटौती में देरी की आशंका
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