वक्फ बिल पेश होते ही विपक्ष ने क्या कह दिया, जिस पर भड़क गए अमित शाह; करा दी बोलती बंद
Waqf Amendment Bill: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष की चिंताओं को खारिज कर दिया और जोर देकर कहा कि संशोधन प्रस्तावों के लिए सरकारी और निजी दोनों सदस्यों को समान समय दिया गया है।

Waqf Amendment Bill: संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की सिफारिशों के बाद आज (बुधवार, 2 अप्रैल) लोकसभा में बहुचर्चित वक्फ संशोधन बिल पेश हो गया। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बिल को चर्चा और पारित कराने के लिए पेश करते हुए कहा कि पहले की यूपीए सरकार ने वक्फ कानून में बदलावों के जरिए इसे अन्य कानूनों से ऊपर कर दिया था, इसलिए इसमें नए संशोधनों की जरूरत पड़ी लेकिन उससे पहले विपक्षी सांसदों ने बिल पेश करने के तौर-तरीके पर सवाल उठाते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया।
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने विपक्षी सांसदों और उनके आरोपों की अगुवाई का नेतृत्व किया और आरोप लगाया कि ये सरकार विधायी प्रक्रिया को ध्वस्त करने की कोशिश कर रही है क्योंकि सदन के सदस्यों को इस विधेयक के बारे में चर्चा करने के लिए तैयारी करने का बहुत कम समय दिया गया। उन्होंने कहा कि कल दोपहर में ही सदस्यों के ध्यान में लाया गया, इससे अनुचित रूप से कम समय मिला। उन्होंने इस तरीके पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी प्रक्रिया निष्पक्षता पर सवाल उठाता है। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि सांसदों के पास संशोधनों का मसौदा तैयार करने और उन्हें प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त समय होना चाहिए।
स्पीकर ओम बिरला खारिज किए विपक्ष के आरोप
इसके जवाब में, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष की चिंताओं को खारिज कर दिया और जोर देकर कहा कि संशोधन प्रस्तावों के लिए सरकारी और निजी दोनों सदस्यों को समान समय दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया में कोई भेदभाव नहीं हुआ है और नियमों का उचित तरीके से पालन किया गया है। विपक्ष के तर्क को आगे बढ़ाते हुए रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) के सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने भी लोकसभा की प्रक्रिया और नियमों के रूल 80(1) का हवाला देते हुए कहा कि सदन को मूल विधेयक के बजाय जेपीसी की सिफारिशों पर चर्चा करनी थी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या जेपीसी के पास नए प्रावधान पेश करने का अधिकार है? उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह के संशोधन इसकी अनिवार्य शक्तियों से परे हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें प्रावधानों पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि सिफारिश के बाद उन्हें शामिल करना कानूनी रूप से संदिग्ध है।
JPC रबर स्टांप नहीं था: अमित शाह
विपक्ष की आपत्तियों का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जेपीसी की भूमिका और उसके संशोधनों का बचाव किया। उन्होंने बताया कि समिति की सिफारिशों को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पहले ही मंजूरी दे दी थी। शाह ने जेपीसी के गठन की मांग करने के बाद प्रक्रिया पर सवाल उठाने के लिए विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे विपक्षी सदस्यों का पाखंड करार दिया और इस बात पर जोर दिया कि समिति ने महज रबर स्टैंप की तरह काम करने के बजाय लोकतांत्रिक तरीके से काम किया।
बिल का नाम भी बदल सकती है JPC: स्पीकर
स्पीकर ओम बिरला ने एमएन कौल और एसएल शकधर द्वारा लिखे गए प्रक्रियात्मक दिशा-निर्देशों का हवाला देकर सरकार के रुख को और मजबूत किया, जो स्पष्ट रूप से जेपीसी को बिलों में संशोधन करने और यहां तक कि जरूरत पड़ने पर पूरी तरह से नया संस्करण तैयार करने का अधिकार देते हैं। उन्होंने पुष्टि की कि समिति ने अपने अधिकारों के भीतर काम किया है, जिससे इस मुद्दे पर आगे की बहस बंद हो गई है। उन्होंने कहा, "समितियां बिलों में संशोधन कर सकती हैं या बिल का नया प्रारूप तैयार कर सकती हैं। वे बिल के सिद्धांत में बदलाव किए बिना उसका नाम भी बदल सकते हैं।" उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह के संशोधन पहले भी हुए हैं।