आर्टिकल 370 पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से रोने लगा पाकिस्तानी मीडिया, पीएम मोदी को भी कोसा
भारत द्वारा अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद दोनों देशों के संबंधों में और गिरावट आई, जब पाकिस्तान ने भारतीय राजदूत को निष्कासित कर दिया और व्यापारिक संबंधों का दर्जा घटा दिया।

भारत के सुप्रीम कोर्ट (SC) ने पूर्ववर्ती राज्य जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को रद्द करने के केंद्र सरकार के फैसले को बरकरार रखा। केंद्र की मोदी सरकार ने अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया था। संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के केंद्र के फैसले को बरकरार रखने वाला सुप्रीम कोर्ट का फैसला सोमवार और मंगलवार दोनों दिन पाकिस्तान के मीडिया में प्रमुख चर्चा का विषय बना रहा। जहां पाकिस्तान के राजनीतिक हलकों ने फैसले की आलोचना की, तो वहीं पाकिस्तान का मीडिया भारत की न्यायपालिका पर अपनी भड़ास निकाल रहा है। पाकिस्तान के नेताओं का कहना है कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले का "कोई कानूनी मूल्य नहीं" है।
पाकिस्तान के राष्ट्रीय दैनिक, अखबार डॉन ने अपने संपादकीय में भारतीय न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पीएम मोदी पर निशाना साधा। अखबार ने 'भारतीय न्याय ने कश्मीर को मोदी की दया पर छोड़ दिया' शीर्षक से अपने संपादकीय में लिखा कि फैसले ने "कश्मीरियों के घावों पर नमक छिड़कने" जैसा काम किया। इसने लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की "नेहरूवादी भूलों" वाली टिप्पणी का भी उल्लेख किया और भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना की।
पाकिस्तान के एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने 5 अगस्त को "कश्मीर के लिए सबसे काला दिन" कहा। वहीं पाकिस्तान के ही एक अन्य राष्ट्रीय दैनिक अखबार ने कहा, "भारत फिर से कश्मीर में फेल रहा"। द नेशन ने कहा, "भारत ने जबरन IOK का विशेष दर्जा रद्द किया"। पाकिस्तान के सभी अखबारों में भारत के सुप्रीम कोर्ट का फैसला प्रमुखता के साथ छपा है।
बता दें कि उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को पूर्ववर्ती राज्य जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को रद्द करने के 2019 के फैसले को सर्वसम्मति से बरकरार रखा। इसे केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण जीत माना जा रहा है। न्यायालय ने अगले साल सितंबर के अंत तक जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने का आदेश देते हुए कहा कि उसका राज्य का दर्जा “जल्द से जल्द” बहाल किया जाए। यह मानते हुए कि 1949 में जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने के लिए भारतीय संविधान में शामिल किया गया अनुच्छेद 370 एक अस्थायी प्रावधान था, प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि भारत के राष्ट्रपति को तत्कालीन राज्य की संविधान सभा की अनुपस्थिति में इस उपाय को रद्द करने का अधिकार था, जिसका कार्यकाल 1957 में समाप्त हो गया था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पाकिस्तान के समाचार प्रसारक GEO न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि "नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया और इस अवैध कदम के खिलाफ किसी भी विरोध को रोकने के लिए, सरकार ने सुरक्षा के लिए घाटियों में लाखों सैनिकों को तैनात किया।"
एक अन्य न्यूज चैनल एआरवाई न्यूज ने लिखा, "नरेंद्र मोदी शासन ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन करते हुए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए को खत्म कर दिया।" इसने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर को "भारत द्वारा अवैध रूप से अधिकृत जम्मू और कश्मीर" कहा।
क्या बोली पाकिस्तानी सरकार
पाकिस्तान ने सोमवार को कहा कि अनुच्छेद 370 पर भारत के उच्चतम न्यायालय के फैसले का ‘‘कोई कानूनी महत्व नहीं’’ है। इसके साथ ही उसने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून भारत की 5 अगस्त, 2019 की ‘‘एकतरफा और अवैध कार्रवाइयों’’ को मान्यता नहीं देता है। पाकिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री जलील अब्बास जिलानी ने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय कानून 5 अगस्त 2019 को भारत द्वारा की गई एकतरफा और अवैध कार्रवाइयों को मान्यता नहीं देता है। भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा न्यायिक अनुमोदन का कोई कानूनी महत्व नहीं है। कश्मीरियों को संयुक्त राष्ट्र के प्रासंगिक प्रस्तावों के अनुसार आत्मनिर्णय का अधिकार है।’’
जिलानी ने इस्लामाबाद में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को कश्मीरी लोगों और पाकिस्तान की इच्छा के खिलाफ ‘‘इस विवादित क्षेत्र की स्थिति पर एकतरफा निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के दर्जे पर भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा दिये गये फैसले को स्पष्ट रूप से खारिज करता है।’’ जिलानी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को लेकर विवाद सात दशकों से अधिक समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एजेंडे में बना हुआ है।
उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर विवाद का अंतिम निपटारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों और कश्मीरी लोगों की आकांक्षाओं के अनुसार किया जाना है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर पर भारतीय संविधान की सर्वोच्चता को स्वीकार नहीं करता है। भारतीय संविधान के अधीन किसी भी प्रक्रिया का कोई कानूनी महत्व नहीं है। भारत अपने देश के कानूनों और न्यायिक फैसलों की आड़ में अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों से पीछे नहीं हट सकता।’’
कश्मीर मुद्दे और पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध अक्सर तनावपूर्ण रहे हैं। भारत द्वारा अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद दोनों देशों के संबंधों में और गिरावट आई, जब पाकिस्तान ने भारतीय राजदूत को निष्कासित कर दिया और व्यापारिक संबंधों का दर्जा घटा दिया। भारत ने बार-बार कहा है कि कश्मीर उसका आंतरिक मामला है, और यह भी कहा है कि वह पाकिस्तान के साथ आतंक, हिंसा और शत्रुता से मुक्त वातावरण में सामान्य, मैत्रीपूर्ण संबंध चाहता है।
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