जेडीयू से डेढ़ गुना हो गए बीजेपी के मंत्री, नीतीश कैबिनेट का कोटा पहली बार फुल
नीतीश कैबिनेट का 36 का कोटा पहली बार फुल हो गया है। हालिया कैबिनेट विस्तार के बाद बिहार में जेडीयू की तुलना में बीजेपी के मंत्रियों की संख्या डेढ़ गुना हो गई है।
बिहार में राज्य कैबिनेट का कोटा पहली बार पूरा भर गया है। नीतीश कैबिनेट में अब कोई मंत्री पद खाली नहीं है। बुधवार को 7 मंत्रियों के शपथ ग्रहण के साथ ही खाली पद भर दिए गए। इसके पहले जब भी नीतीश सरकार में मंत्रियों का मनोनयन हुआ, कुछ पद खाली ही रखे गए। ऐसा पहली बार हुआ है जब सभी 36 पदों पर मंत्री तैनात हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) कोटे की तुलना में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कोटे के मंत्रियों की संख्या डेढ़ गुनी हो गई है।
साल 2005 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी थी, उसके बाद से सरकार में कभी 36 मंत्री नहीं रहे। हमेशा कुछ सीटें खाली रखी गईं। सीएम नीतीश खास रणनीति के तहत ऐसा करते रहे हैं। इसके पहले साल 2010 में 30 मंत्रियों ने शपथ ली जबकि 2015 में 29 मंत्री बने थे। 2020 में भी 30 मंत्रियों ने शपथ ली थी, जबकि 2022 में महागठबंधन की सरकार में 31 मंत्री थे। इसके पहले और बाद में भी लगभग इतने ही मंत्री बनते रहे।
नियमानुसार बिहार में अधिकतम 36 मंत्री हो सकते हैं। यहां पहले से 30 मंत्री थे। एक ने इस्तीफा दिया, जिससे मंत्रियों के 7 पद रिक्त हो गए थे। बुधवार को शपथ ग्रहण के बाद नीतीश कैबिनेट में जेडीयू के मंत्रियों की संख्या 13 ही रह गई, जबकि भाजपा कोटे के मंत्रियों की संख्या बढ़कर 21 हो गई। इसके अलावा एक-एक निर्दलीय और हम से एक-एक मंत्री हैं। इसके पहले भाजपा कोटे के केवल 15 मंत्री ही थे। हालिया के विस्तार के बाद भाजपा के मंत्रियों की संख्या जेडीयू की तुलना में डेढ़ गुनी हो गई है।
बुधवार को शपथ ग्रहण के पहले यह भी कयास लगाए गए थे कि कम से कम दो मंत्री जेडीयू कोटे के होंगे। लेकिन, जब सूची सामने आई तो सब चौंक गए। कई राजनीतिक विश्लेषक भी हैरान थे, क्योंकि सभी सात नए मंत्री भाजपा के थे।
क्या है प्रावधान:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 (1ए) के अनुसार किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री समेत मंत्रियों की संख्या, विधानसभा के कुल सदस्यों के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती है। बिहार विधानसभा में कुल 243 सदस्य हैं। इसका 15 प्रतिशत 36.45 होता है। ऐसे में मंत्रियों की संख्या 37 नहीं हो सकती है। इसका अर्थ ये है कि बिहार में मुख्यमंत्री समेत कुल 36 मंत्री ही बन सकते हैं। नीतीश कैबिनेट में अब अधिकतम 36 मंत्री हो गए हैं।