बोले उरई: शहर में सिंध की पहचान भी झलकनी चाहिए
Orai News - उरई का सिंधी समाज भारत-पाक विभाजन के बाद विस्थापित हुआ था और आज भी अपनी पहचान और सरकारी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। राजनीतिक प्रतिनिधित्व की कमी के कारण उनकी परंपराएं कमजोर हो गई हैं। लोग वृद्धा और...
उरई। सालों पहले विस्थापित हुआ हमारा सिंधी समाज आज पहचान को तरस रहा है। भारत विभाजन का दंश हमसे ज्यादा किसी और ने नहीं भुगता। संख्या में कम होने के साथ राजनीतिक हिस्सेदारी न होने से हमारी परंपराएं, विरासत और पहचान को ज्यादा मजबूती नहीं मिल सकी। सिंधी संतों को भी पर्याप्त सम्मान मिलना चाहिए। शहर की सिंधी कॉलोनी में एक स्ट्रीट लाइट तक नहीं लगी है, संख्या कम होने से अधिकारी भी नहीं सुनते हैं। भारत, पाक विभाजन के दौरान विस्थापित होकर उरई शहर आए सिंधी परिवार आज भी अपनी पहचान को मोहताज हैं। सरकारी सुविधाओं से वंचित तो हैं ही, साथ ही प्रतिनिधित्व से भी कोसों दूर हैं। यही वजह है कि सिंधी समाज के बुजुर्गों को वृद्धा, विधवा पेंशन के लिए तो युवाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए सरकारी अनुदान के लिए दफ्तरों में दर-दर भटकना पड़ रहा है। इन्हीं समस्याओं पर आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान से सिंधी समाज के लोगों ने चर्चा की। मोहन लालवानी ने बताया कि संख्या में कम होने से अफसर तो छोड़िए, जनप्रतिनिधि तक हमारी बात को गंभीरता से नहीं लेते हैं, इससे सिंधी कॉलोनी के लोग जरूरी सुविधाओं को तरस रहे हैं। भारत-पाक विभाजन से विस्थापित होने का दंश आज भी सिंधी समाज को भुगतना पड़ रहा है। विस्थापन के दौरान शहर आए करीब 50 परिवार स्टेशन रोड पर बस गए। किसी ने गिरधरपुरी वार्ड में आशियाना बनाया तो कोई कोरी क्र्वाटर में जाकर रहने लगा। सिंधी समाज का जाना माना चेहरा लक्ष्मण दास बबानी ने बताया कि कहने के लिए सिंधी सत्संग, झूले लाल मंदिर स्टेशन रोड की पहचान हैं, पर किसी ने इनको विकसित करने की जहमत नहीं उठाई। हर बार समाज के लोग अपने खर्चे से आयोजन कराते हैं। इसी तरह सुनील बताते हैं कि कई बार स्वरोजगार का मन बनाया। डूडा से लेकर उद्योग विभाग में सरकारी मदद के लिए गए, फाइल तो बनी, पर पास नहीं हो पाई। इससे मजबूरन खुद का पैसा लगाकर काम करना पड़ा। मंजू देवी बबानी बताती हैं कि महिलाओं के लिए पीएम आवास से लेकर उज्ज्वला समेत ढेर सारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, पर लाभ गिने चुने लोगों को ही मिल पाया। जागरूकता के अभाव में भी समाज के लोग योजनाओं का लाभ लेने में पीछे रह गए। माया वर्माने कहा कि सुकन्या समृद्धि योजना बेटियों के भविष्य के लिए चलाई गई पर लाभ कुछ को ही मिल पाया। काजल ने कहा कि सिंधी समाज में तमाम परिवार श्रमिक का काम करते हैं। श्रम विभाग के माध्यम से ढेर सारी योजनाएं हैं। पर विभाग ने एक बार भी हमारी कॉलोनी में कैंप नहीं लगाया। इससे योजनाओं का पता नहीं चल पाता है। वहीं, महिला सुरक्षा के नाम पर सरकार खूब डंका पीट रही है। मदद के लिए जारी हेल्पलाइन नंबरों का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। पर एक बार भी सिंधी बाहुल्य क्षेत्र में महिला पुलिस ने कैंप लगाकर महिलाओं की समस्याओं को नहीं जाना। मनीषा ने कहा कि जब कभी भी कैंप आदि लगते हैं तो सिंधी समाज को धनाढ्य मान कर उन पर ध्यान नहीं दिया जाता है। जबकि समाज में हर वर्ग के लोग शामिल हैं।
सड़क ऊंची और मकान नीचे होने से घुटनों तक भरता पानी
गिरधरपुरी, जहां पर सबसे ज्यादा सिंधी परिवार रहते हैं, वहां पर बस्ती के लिए जो सड़क गई है, वहां सड़क ऊंची और मकान नीचे होने से बरसात में जलभराव हो जाता है। मकानों में घुटनों तक पानी भर जाता है। इससे घर गृहस्थी का सामान तक भीग जाता है। कई बार तो ऐसा हुआ कि आंगन तक पानी पहुंचने से खाने-पीने का सामान भी बर्बाद हो गया। कई बार अधिकारियों को समस्या बताई गई लेकिन समाधान नहीं कराया गया।
महीनों से टूटी नाले की पुलिया
स्टेशन रोड गिरधरपुरी मोहल्ले को जाने वाले मेन रास्ते के पास नाला खुला है। छह माह पहले पुलिया टूट गई थी, इसमें मवेशियों के साथ हर रोज कोई न कोई गिरता है। रात में कई बार दोपहिया वाहन सवार तक गिर चुके हैं। ई-रिक्शा और ऑटो सवार भी आए दिन नाले में गिरकर चोटिल हो जाते हैं। दिन भर अफसरों का गुजरना होता है लेकिन किसी ने पुलिया की मरम्मत नहीं कराई। जबकि इसकी शिकायत अफसरों से कई बार की गई।
समाज के लोगों का दर्द
जिले में समाज का कोई बड़ा प्रतिनिधित्व न होने से समाज के लोगों की आवाज दब जाती है।
- मोहन लालवानी
वोट सभी चाहते हैं, पर सुविधाओं से मतलब नहीं है। बच्चों के अलग स्कूल की व्यवस्था नहीं है।
- हरीश कुमार
सरकारी विभागों में तवज्जो नहीं मिलती है। इससे शिकायतों का समाधान त्वरित नहीं हो पाता है।
-आशीष कुमार
सरकारी सेवाओं से कई आयोजन किए जाते हैं, पर सिंधी समाज के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
- दौलत राम
सिंधी समाज के दो मंदिर हैं पर प्रशासन का सहयोग नहीं मिलता है, अपने खर्च पर करना पड़ता है।
लक्ष्मण दास बबानी
सिंधी कॉलोनी में स्वास्थ्य शिविर नहीं लगाए गए। इससे जांच कराने अस्पताल जाना पड़ता है।
-कपिल
सिंधी समाज को आज भी सड़क, बिजली और पानी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है।
-राजकुमार
जनसंख्या कम होने की वजह से सरकार भी हमारी सुविधाओं पर ध्यान नहीं देती है।
- बग्घामल लालवानी
बड़े शहरों में सिंधी समाज के लिए अलग से विद्यालय हैं, पर शहर में इस तरह की कोई सुविधा नहीं है।
- गुरमुख दास
सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए हर विभाग को हफ्ते में एक बार कैंप लगाना चाहिए।
- किशोर बबानी
हर जगह सिंधी संस्कृति को बढ़ावा देने को आयोजन किए जाते हैं। पर शहर में कुछ नहीं होता है।
-बब्लू
गिरधरपुरी व कोरी क्र्वाटर में जल निकासी के इंतजाम न होने से जलभराव होता है।
-आनंद कुमार
सुझाव
1. शहर में कहीं पर भी एक सिंधी स्कूल खोलकर बच्चों को राहत दी जाए।
2. जो अनुदानित विद्यालय हैं उन्हें सिंधी अल्पसंख्यक घोषित किया जाए।
3. शहर में जहां पर सिंधी परिवार रहते हैं, वहां पर चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था की जाए।
4. सिंधी त्योहारों जैसे चेट्रीचंड पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाए।
5. सिंधी महोत्सव का आयोजन कराया जाए, सिंधी कलाकारों को महत्व मिले।
6. सिंधी समाज की शिकायतों पर सरकारी विभाग के अफसर ध्यान दें।
7. सिंधी मंदिरों के लिए किसी तरह का कोई सहयोग नहीं मिलता।
शिकायतें
1. शहर में सिंधी समाज के लोग शिकायतों के निस्तारण के लिए परेशान रहते हैं।
2. शहर में एक नहीं, दो सिंधी मंदिर हैं। सरकार की तरफ से सहयोग नहीं दिया जाता है।
3. शहर तो दूर की बात, जिले में समाज का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई विधायक तक नहीं है।
4. सिंधी समाज के लोगों को भाषाई अल्पसंख्यक होने का लाभ नहीं मिलता है।
5. सिंधी आबादी वाले क्षेत्रों में जन सुविधाओं का टोटा होने से लोग परेशान रहते हैं।
4. कॉलोनी में जलभराव और बिजली के जर्जर तारों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
5. सिंधी कलाकारों को प्रोत्साहन नहीं मिलता है, इससे कलाकार पिछड़ रहे हैं।
बोले-जिम्मेदार
सिंधी कॉलोनी के बाशिंदों को प्रकाश व्यवस्था से लेकर बिजली, पानी और सड़क की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। सिंधी समाज के लोगों को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। वह स्वयं कालोनी जाकर सिंधी समाज के लोगों से मिलकर हाल चाल लेंगी।
-गिरजा चौधरी, उरई नगर पालिकाध्यक्ष
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