बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए। इस बैठक में राजस्थान के उम्मीदवारों के नाम पर मंथन हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ किसे चुनाव लड़ाया जाए, इसको लेकर भी मंथन हुआ।
चुनाव अभियान के दौरान, गहलोत ने उपराष्ट्रपति की पांच जिलों की यात्रा पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि चुनाव नजदीक है और इस यात्रा से सभी प्रकार के संदेश जाएंगे, जो लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है।
केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि राजेंद्र गुढ़ा ने विधानसभा पटल पर ये विषय रखा कि अशोक गहलोत सरकार से महिलाओं की सुरक्षा नहीं हो पाई है तो उन्हें मंत्री पद से निकाल दिया गया।
मुख्यमंत्री बनने की चाह में बागी तेवर अपनाकर सचिन पायलट पहले ही डिप्टी सीएम और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद का त्याग कर चुके हैं। ऐसे में वह कहां जाकर राजी होंगे, यह कहना मुश्किल है।
Sachin Pilot News: एक शख्स ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा, ''आईपैक से 100 लोग वर्तमान में सचिन के साथ काम कर रहे हैं ... हमें लगभग 1,100 और नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है।''
राजस्थान में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं। जनता की सरकार बदल देने की रोटेशन पॉलिसी को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने बीजेपी के हिमाचल प्रदेश वाले नारे से चुनाव में उतरने का फैसला किया है।
पुलिस उपायुक्त ने कहा, 'आरोपी हमारी हिरासत में है और पूछताछ जारी है। हम कड़ियों को जोड़ने के लिए सभी पहलुओं पर गौर कर रहे हैं। हम घटना में शामिल सभी व्यक्तियों को लेकर काम कर रहे हैं।'
सूत्रों ने कहा कि हमारी तरफ से उठाई जा रही मांगों पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया गया है। पार्टी नेतृत्व की सीएम से क्या बात हुई है, इसकी जानकारी नहीं दी है।
हिमाचल प्रदेश व कर्नाटक के विधानसभा चुनावों में दो दशक से ज्यादा समय से हर बार सत्ता बदलाव के रिवाज को कामय रखा और भाजपा को काफी कोशिश करने के बाद भी सत्ता बरकरार रखने में सफलता नहीं मिली।
कांग्रेस में यह कोई नई बात नहीं है। पार्टी के अंदर इस तरह की आवाज उठती रही है। पर कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धरमैया और डीके शिवकुमार के बीच हुई बयानबाजी से पार्टी की काफी फजीहत हुई।