सरकार ने खर्च किये करोड़ों पर काम नहीं कर रही ई-अदालतें, ऐसा क्यों बोले MP सुशील मोदी
राज्यसभा सांसद सुशील मोदी की अध्यक्षता वाले पैनल ने निराशा व्यक्त की कि सरकार ने ऐसी अदालतों के कामकाज के लिए बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं, पर वे ठीक से काम नहीं कर रहीं।

संसदीय पैनल ने एक बैठक के दौरान चिंता व्यक्त की कि इलेक्ट्रॉनिक अदालतें (ई-न्यायालय) काउंटी में अपनी क्षमता के अनुसार काम नहीं कर रही हैं। कई सांसदों ने अपनी चिंता व्यक्त की। भाजपा के राज्यसभा सांसद सुशील मोदी की अध्यक्षता वाले पैनल ने निराशा व्यक्त की कि सरकार ने ऐसी अदालतों के कामकाज के लिए बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं, लेकिन वे ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।
एक सूत्र ने एएनआई को बताया, "भारत सरकार ने ई-अदालतों में बुनियादी ढांचे के लिए करीब 7,000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, लेकिन ये अदालतें शायद ही काम करती हैं। हमने मंत्रालय से इसका कारण पूछा है और हम भविष्य के लिए स्थिति की समीक्षा को बैठक की उम्मीद कैसे कर सकते हैं।" बता दें कि मंत्रालय अगले कुछ हफ्तों में लिखित संचार के माध्यम से समिति को जवाब देगा।
कुछ विपक्षी सांसदों ने अधिकारियों से राज्य की अदालतों, खासकर उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के बारे में पूछा है। एक अन्य सूत्र ने एएनआई को बताया, "सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की नियुक्ति को प्राथमिकता दी गई है, जबकि राज्य उच्च न्यायालयों की नियुक्ति चयनात्मक और असंगत रही है।"
सूत्र के मुताबिक, मामलों का लंबित होना एक बड़ी चिंता है। "मामलों में न्यायाधीशों की नियुक्ति में लगभग 35 प्रतिशत रिक्ति एक बड़ी चिंता है। न्याय वितरण की प्रतीक्षा कर रहे मामलों की संख्या को कम करने के लिए इन्हें प्राथमिकता पर होना चाहिए।"
पैनल ने 13 मार्च को शुरू होने वाले बजट सत्र 2023 के दूसरे भाग से पहले अनुदान मांगों पर शुक्रवार को बैठक की। इसमें विधि सचिव, न्याय विभाग के सचिव, और सर्वोच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार सहित कानून मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
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