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आप यहां की रानी नहीं हैं, आपने संसद के अंदर सांसदों को पीटा; सोनिया गांधी पर भाजपा MP का बड़ा हमला

2012 की समाचार रिपोर्टों में लोकसभा में अराजकता के दौरान सोनिया गांधी के हस्तक्षेप का जिक्र है। उन्होंने कथित तौर पर श्री नारायणसामी से कागजात छीनने के बाद यशवीर सिंह को पकड़ लिया था।

Amit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीWed, 20 Sep 2023 03:12 PM
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आप यहां की रानी नहीं हैं, आपने संसद के अंदर सांसदों को पीटा; सोनिया गांधी पर भाजपा MP का बड़ा हमला

महिला आरक्षण विधेयक पर आज लोकसभा में तीखी बहस हुई। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि 2012 में महिला आरक्षण बिल पर बहस के दौरान सदन में अराजकता देखी गई। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने समाजवादी पार्टी के एक सदस्य का "कॉलर पकड़ने की कोशिश" की थी। दुबे ने आरोप लगाया कि संप्रग सरकार के दौरान 2011 में लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पेश किये जाने के दौरान और 2013 में पदोन्नति में आरक्षण संबंधी विधेयक पेश किये जाने के दौरान कांग्रेस के सदस्यों ने विपक्षी सदस्यों के साथ अभद्र व्यवहार किया था।

बुधवार को गोड्डा से बीजेपी सांसद ने सत्ता पक्ष के लिए महिला आरक्षण बिल पर बहस की शुरुआत की। इससे विपक्षी सांसदों का विरोध शुरू हो गया। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि एक महिला सांसद को भाजपा की तरफ से बोलना चाहिए। इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने हस्तक्षेप करते हुए सवाल किया कि एक पुरुष महिलाओं से संबंधित मुद्दे क्यों नहीं उठा सकता।

"आपने सहयोगियों की पिटाई की थी"

इसके बाद इंडिया गठबंधन पर कटाक्ष करते हुए, निशिकांत दुबे ने कहा कि जब तत्कालीन यूपीए सरकार 2011 में लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक लेकर आई थी, तब कांग्रेस सांसदों ने लोकसभा के वेल में अपने सहयोगियों की पिटाई की थी। इसके बाद उन्होंने प्रमोशन में आरक्षण लागू करने के कानून पर 2012 में हुई चर्चा का जिक्र किया।

दूबे ने कहा, "जब मैं पदोन्नति में आरक्षण लाने के विधेयक के बारे में बात करूंगा, तो ये सब के सब गैंग खड़े हो जाएंगे। यहीं (कांग्रेस मंत्री) वी नारायणसामी विधेयक पेश कर रहे थे। समाजवादी पार्टी के यशवीर सिंह अनुसूचित जाति के सांसद थे। यही यशवीर सिंह गए और नारायणसामी से बिल के कागजात छीन लिए। इसी पार्लियामेंट में सबसे पहले यदि कोई उसका कॉलर पकड़ने आया तो यही मैडम श्रीमती सोनिया गांधी थीं।'' 

उन्होंने आगे कहा, "मैंने तब उनसे (सोनिया गांधी से) कहा था, 'आप यहां की तानाशाह नहीं हैं, आप यहां की रानी नहीं हैं। आप यहां वेल में लड़ नहीं सकतीं।" उन्होंने कहा, "मुलायम सिंह यादव ने तब कहा था कि अगर बीजेपी हस्तक्षेप नहीं करती तो उनकी पार्टी के सांसद नहीं बच पाते। आपने सांसदों की हत्या की कोशिश की। अब आप गठबंधन में एक साथ आए हैं।"

2012 में क्या हुआ था?

2012 की समाचार रिपोर्टों में लोकसभा में अराजकता के दौरान सोनिया गांधी के हस्तक्षेप का जिक्र है। उन्होंने कथित तौर पर श्री नारायणसामी से कागजात छीनने के बाद यशवीर सिंह को पकड़ लिया था और पूछा था कि "आप क्या कर रहे हैं।" नारायणसामी ने बाद में पुडुचेरी के मुख्यमंत्री के रूप में काम किया। समाचार रिपोर्टों में कहा गया है कि सोनिया गांधी ने यशवीर सिंह के हाथों से कागजात लेने की कोशिश की थी, लेकिन ऐसा नहीं कर सकीं। समाजवादी पार्टी के तत्कालीन प्रमुख दिवंगत मुलायम सिंह यादव ने "हमारे सांसदों पर हमले" की निंदा की थी।

यह गोल प्रधानमंत्री ने मारा है- दूबे

इससे पहले निचले सदन में महिला आरक्षण से संबंधित ‘संविधान (128वां संशेधान) विधेयक, 2023’ पर चर्चा में भाग लेते हुए दुबे ने कहा कि कांग्रेस समेत विपक्षी दल इतने वर्षों तक इस विधेयक को लेकर नहीं आए और प्रधानमंत्री मोदी तथा भाजपा ने इसे लाने का नैतिक साहस दिखाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस विधेयक का श्रेय लेना चाहती है, लेकिन विपक्ष गलत विधेयक लेकर आया था।

दुबे ने कहा, ‘‘आपने इसमें भी राजनीति की। जो जीता वही सिकंदर होता है। गोल मारने वाले को ही श्रेय दिया जाता है और आज यह गोल प्रधानमंत्री ने मारा है। यह प्रधानमंत्री और भाजपा का विधेयक है, आपको मानना पड़ेगा।’’ उन्होंने कांग्रेस पर यह आरोप भी लगाया कि वह कभी राज्यसभा और विधान परिषद में महिलाओं को आरक्षण देने की मांग करके तो कभी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को आरक्षण और कोटा में कोटा की बात करके इस विधेयक पर भी राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने संविधान सभा के समय से लेकर आज तक उच्च सदन और विधान परिषद में आरक्षण की बात नहीं की, लेकिन अब ‘गलत तरह का माहौल पैदा’ कर रही है। 

दुबे ने कहा, ‘‘आप (कांग्रेस) राजनीति के माध्यम से इस विषय को लॉलीपॉप बनाते रहे। आप चाहते हैं कि यह सरकार भी यही करे।’’ भाजपा सदस्य ने कहा कि भले ही कांग्रेस के नेता महिला आरक्षण विधेयक लाने का श्रेय लेने की कोशिश करते रहें लेकिन इस समुदाय के लिए सबसे पहले आवाज उठाने वालों में पश्चिम बंगाल से गीता मुखर्जी और भाजपा नेता सुषमा स्वराज थीं।

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