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लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए घटाई जाएगी आयु सीमा? संसदीय समिति ने दिया ये सुझाव

समिति ने कहा कि कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे विभिन्न देशों की प्रथाओं पर गौर करने के बाद, समिति का मानना है कि राष्ट्रीय चुनावों में उम्मीदवार बनने के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए।

Amit Kumar नीरज चौहान (HT), नई दिल्लीFri, 4 Aug 2023 09:28 PM
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लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए घटाई जाएगी आयु सीमा? संसदीय समिति ने दिया ये सुझाव

संसद की एक स्थायी समिति ने लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु सीमा में घटाने का सुझाव दिया है। संसदीय पैनल ने "निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक से अधिक युवाओं की भागीदारी को सक्षम करने" के लिए लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की उम्र 25 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष करने की सिफारिश की है। हालांकि इसने सरकार और भारत के चुनाव आयोग (ईसी) को आम मतदाता सूची को लागू करते समय सावधानी से आगे बढ़ने और संघवाद के सिद्धांतों का पालन करने के लिए आगाह किया है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सुशील कुमार मोदी की अध्यक्षता वाली कानून और कार्मिक विभाग संबंधी स्थायी संसदीय समिति ने राष्ट्रीय चुनावों या लोकसभा चुनावों के लिए, विशेष रूप से न्यूनतम आयु को मौजूदा 25 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष करने की सिफारिश की। समिति ने शुक्रवार को संसद में 'चुनाव प्रक्रिया के विशिष्ट पहलुओं और उनके सुधार' पर 132वीं रिपोर्ट में ये सिफारिशें की हैं।

इसने कहा, “समिति का मानना है कि चुनाव में उम्मीदवारी के लिए न्यूनतम आयु की आवश्यकता को कम करने से युवा व्यक्तियों को लोकतंत्र में शामिल होने के समान अवसर मिलेंगे। इस दृष्टिकोण को वैश्विक प्रथाओं, युवा लोगों के बीच बढ़ती राजनीतिक चेतना और युवा प्रतिनिधित्व के फायदों जैसे बड़ी मात्रा में सबूतों से बल मिलता है।" समिति ने अपनी रिपेार्ट में कहा, ‘‘कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे विभिन्न देशों की प्रथाओं पर गौर करने के बाद, समिति का मानना है कि राष्ट्रीय चुनावों में उम्मीदवार बनने के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। इन देशों के उदाहरण स्पष्ट करते हैं कि युवा विश्वसनीय और जिम्मेदार राजनीतिक भागीदार हो सकते हैं।’’

समिति ने जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थुनबर्ग के नेतृत्व में 'फ्राइडेज फॉर फ्यूचर' और बंदूक नियंत्रण कानून के लिए छात्र के नेतृत्व वाले 'मार्च फॉर अवर लाइव्स' जैसे अभियानों का हवाला दिया। युवाओं के नेतृत्व वाले वैश्विक अभियानों का उदाहरण देते हुए समिति ने कहा कि वे युवाओं की "रैली करने और महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक चिंताओं को उठाने की क्षमता" को उजागर करते हैं।

इसने आगे कहा, “इसलिए, समिति विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारी के लिए न्यूनतम आयु की आवश्यकता को कम करने का सुझाव देती है। समिति का मानना है कि यह उपाय नीतिगत विचार-विमर्श और परिणामों में व्यापक दृष्टिकोण को बढ़ावा दे सकता है। इसके अलावा, युवा उम्मीदवार चर्चा और सहयोग को सुविधाजनक बनाकर विभिन्न पीढ़ियों को जोड़ने में मदद कर सकते हैं। इससे राजनीतिक प्रक्रिया में विश्वसनीयता और विश्वास बढ़ सकता है।”

विधानसभा या लोकसभा में चुनाव लड़ने की वर्तमान आयु 25 वर्ष और उससे अधिक है। चुनाव आयोग ने लोकसभा, विधानसभा या विधान परिषदों में शामिल होने के लिए वर्तमान निम्नतम आयु की आवश्यकता को बदलने का समर्थन नहीं किया है, जिसमें कहा गया है कि "इन जिम्मेदारियों के लिए 18 साल के युवाओं के पास आवश्यक अनुभव और परिपक्वता की उम्मीद करना अवास्तविक है"।

आम मतदाता सूची को लेकर केंद्र और ईसीआई की वर्तमान सरकार काम कर रही है। इसको लेकर संसदीय पैनल ने राज्य की शक्तियों पर संभावित प्रभाव के बारे में चिंता व्यक्त की है, जिसका उल्लेख भारत के संविधान के अध्याय IX और IX A के तहत किया गया है। समिति ने कहा, “इसलिए समिति सुझाव देती है कि ईसीआई आम मतदाता सूची तैयार करने की जिम्मेदारी लेने से पहले राज्यों के संवैधानिक प्रावधानों और शक्तियों पर उचित विचार कर सकता है। ईसीआई संविधान के तहत निहित संघवाद के सिद्धांतों और सूची II प्रविष्टि 5 के तहत राज्य चुनाव आयोगों के लिए आरक्षित शक्तियों को भी ध्यान में रख सकता है।” 

यह देखा गया कि "केंद्र सरकार और ईसीआई द्वारा प्रस्तावित एक सामान्य मतदाता सूची को लागू करना वर्तमान में संविधान के अनुच्छेद 325 के दायरे से बाहर है"। यह अनुच्छेद निर्धारित करता है कि संसद और राज्य विधानमंडलों के चुनावों के लिए अलग-अलग मतदाता सूची का उपयोग किया जाना चाहिए। इसमें कहा गया है, "समिति सरकार को सावधानी से आगे बढ़ने, संविधान में निहित संघवाद के सिद्धांतों का पालन करने और कोई भी कार्रवाई करने से पहले संभावित परिणामों का सावधानीपूर्वक आकलन करने की सलाह देती है।"

समिति ने ईसीआई से आगे कहा कि "सावधान रहें और राज्य को लेकर अपनी सीमाओं का उल्लंघन करने से बचें"। भारत में दो मुख्य प्रकार की मतदाता सूचियाँ हैं। एक राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय चुनावों के लिए भारत के चुनाव आयोग द्वारा देखरेख की जाने वाली सामान्य मतदाता सूची, और दूसरी नगरपालिका एवं पंचायत चुनावों के लिए राज्य चुनाव आयोगों द्वारा तैयार की गई अलग-अलग मतदाता सूची। 

चुनाव से संबंधित एक अन्य मुद्दे में, उम्मीदवारों द्वारा झूठे हलफनामे को लेकर भी सुझाव दिया है। पैनल ने उम्मीदवार द्वारा झूठी घोषणा करने पर सजा को अधिकतम दो साल की कैद और जुर्माने तक बढ़ाने की सिफारिश की। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 125ए के तहत झूठी जानकारी देने पर फिलहाल छह महीने की सजा है।

पैनल ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट में कहा, "हालांकि, यह जुर्माना केवल असाधारण मामलों में ही लगाया जाना चाहिए, छोटी त्रुटियों या अनजाने में हुई गलतियों के लिए नहीं।" समिति ने प्रस्तावित किया कि "जानबूझकर अन्य आवश्यकताओं की उपेक्षा करना, जैसे कि आरपी अधिनियम, 1951 की धारा 33ए में उल्लिखित जानकारी प्रस्तुत करना, जैसा कि धारा 125ए में सूचीबद्ध है, उसको "भ्रष्ट आचरण" माना जाना चाहिए।

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