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क्या अपनों की दूरी बनी अखिलेश यादव की मजबूरी? क्यों अरविंद केजरीवाल और नीतीश कुमार से लगी उम्मीद

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव अपने गठबंधन को व्यापकता देने के लिए पीडीए (पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक) का नारा देते हुए कहा कि सभी विपक्षी दलों को साथ आना चाहिए और बड़ा दिल दिखाना चाहिए।

Nisarg Dixit हिन्दुस्तान, नई दिल्लीSat, 24 June 2023 09:14 AM
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क्या अपनों की दूरी बनी अखिलेश यादव की मजबूरी? क्यों अरविंद केजरीवाल और नीतीश कुमार से लगी उम्मीद

उत्तर प्रदेश में विपक्षी एका की धुरी बनने की कोशिश कर रही समाजवादी पार्टी अब नए सिरे न केवल अपनी प्रासंगिकता बढ़ा रही है, बल्कि अपने ढीले- ढाले पड़ चुके गठबंधन को भी नई शक्ल देने में जुट गई है। बीते विधानसभा चुनाव के बाद गंगा में बहुत पानी बह चुका है। सपा गठबंधन में शामिल पुराने दल छिटक गए हैं या छिटकने की कगार पर हैं। 

सुभासपा मुखिया ओम प्रकाश राजभर भाजपा के साथ जाएंगे या कांग्रेस बसपा के साथ यह तो चुनाव के वक्त पता चलेगा, लेकिन सपा के प्रति उनकी तल्खी कम होने का नाम नहीं ले रही। हालांकि वह कभी भाजपा के करीब जाते दिखते हैं तो कभी दूर जाते। अखिलेश के सहयोगी महान दल भी सपा से नाराजगी के चलते उनका साथ छोड़ चुका है। उसकी शिकायत है कि सपा ने सुभासपा के मुकाबले उसे कम तवज्जो दी। महान दल के नेता केशव देव मौर्य अब बसपा के नजदीक जाते दिख रहे हैं।

कौन दिखाएगा बड़ा दिल
अखिलेश अपने गठबंधन को व्यापकता देने के लिए पीडीए (पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक) का नारा देते हुए कहा कि सभी विपक्षी दलों को साथ आना चाहिए और बड़ा दिल दिखाना चाहिए। गठबंधन के पुराने व मजबूत साथी राष्ट्रीय लोकदल यूं तो साथ बना हुआ है, लेकिन वह कांग्रेस को लेकर खासा नर्म है और चाहता है कि कांग्रेस को भी गठबंधन में लाया जाए और उसका मानना है कि इसके लिए ज्यादा सीट देने का बड़ा दिल भी सपा को दिखाना चाहिए। अखिलेश यादव अपने चाचा को शिवपाल को पार्टी में ला चुके हैं। लेकिन अभी उनकी भूमिका बहुत प्रभावी होती नहीं दिख रही।

सपा को नए साथियों के साथ आने की उम्मीद
सपा को नए साथी के रूप में आम आदमी पार्टी का साथ मिलने जा रहा है। हाल में सपा ने पार्टी नेता व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अध्यादेश के मुद्दे पर समर्थन का ऐलान किया है। आम आदमी पार्टी पहले भी सपा से गठबंधन की इच्छुक दिखी थी लेकिन संभावना है कि इस बार सपा के गठबंधन में आम आदमी पार्टी की भी इंट्री हो जाए। 

फिलहाल इसमें भी पेंच है। अगर सपा के साथ कांग्रेस आती है तो आम आदमी पार्टी के लिए असहज स्थिति हो सकती है। गठबंधन से सपा को कितना फायदा होगा यह अभी कहना मुश्किल है लेकिन मनोवैज्ञानिक तौर पर सपा इसके जरिए विरोधियों पर बढ़त बनाती दिख सकती है। 

दलित नेता चंद्र शेखर आजाद की भीम आर्मी का पश्चिमी यूपी के कुछ हिस्सों में प्रभावी स्थिति में है। यह पार्टी भी अब सपा के साथ खड़ी दिखी है। अपना दल का दूसरा धड़ा सपा के साथ पहले से ही है। सपा के साथ दूसरे राज्यों में खासे प्रभावी लेकिन यूपी में कोई खास प्रभाव न रखने वाली एनसीपी, तृणमूल कांग्रेस आदि भी गठबंधन में शामिल हैं।

राजद व जदयू दोनों अखिलेश के साथ
यूपी में राजद के अलावा जनता दल यू भी अखिलेश यादव के साथ खड़ा दिखेगा। जद यू के वरिष्ठ नेता व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अगर यूपी से लोकसभा चुनाव लड़ने का मन बनाते हैं तो सपा भी शिद्दत से उन्हें जिताने में एड़ी चोटी जोर लगाएगी। अब अखिलेश यादव के राजद व जद यू दोनों से मधुर रिश्ते हैं।

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