'एनिमल' की आंधी में कहीं गायब सी हो गई 'जोरम', मनोज बाजपेयी ने निकाला 'कलेक्शन क्रेज' पर गुस्सा
मनोज बाजपेयी ने भारत में बढ़ रहे कलेक्शन क्रेज के बारे में कहा कि अब आप फिल्म बनाते हुए पूरे वक्त यह सोच रहे होते हो कि पब्लिक को बेवकूफ कैसे बनाया जाए ताकि वो आपकी ट्रिक्स में फंसकर थिएटर तक आए।

बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर की फिल्म 'एनिमल' ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा जलजला पैदा किया कि आसपास रिलीज हुई लगभग सभी फिल्मों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। 'एनिमल' की चलाई आंधी की चपेट में आई फिल्मों में मनोज बाजपेयी की फिल्म 'जोरम' भी शामिल है। मनोज बाजपेयी ने 'एनिमल' की ब्लॉकबस्टर कमाई के बारे में कहा कि मैं हमेशा ही बॉक्स ऑफिस वाले पागलपन के खिलाफ बोलता रहा हूं। मैंने हमेशा ही यह माना है कि इसने भारत में फिल्ममेकिंग के कल्चर को बरबाद किया है।
'एनिमल' की आंधी में कहीं गायब सी हो गई 'जोरम'
मनोज बाजपेयी ने कहा, "लोगों के मुंह पर नंबर्स फेंकते जाना सही चीज नहीं है।" 'जोरम' फेम एक्टर मनोज ने कहा कि जिस चीज से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है वो यह है कि अब पब्लिक ने भी वही भाषा बोलना शुरू कर दिया है। एक्टर ने बताया, "जब आप लोगों से बात करेंगे तो वो फौरन आपको एक नंबर बता देंगे कि फलां फिल्म ने इतने पैसे कमाए हैं।"
"इसने सिनेमा से जुड़ी हर चीज को बरबाद कर दिया है"
मनोज बाजपेयी ने कहा कि पब्लिक यह मानने लगी है कि अगर किसी फिल्म ने 100 करोड़ या उससे ज्यादा रुपये कमाए हैं तो यह बहुत अच्छी फिल्म है और इतनी अच्छी है कि इसे देश के सभी सम्मान दे दिए जाने चाहिए। मनोज बाजपेयी ने कहा, "इस सोच ने हमारे सिनेमाई सफर से जुड़ी हर चीज को बरबाद कर दिया है। इसने फिल्म इंडस्ट्री में रचनात्मकता के दृष्टिकोणों को बहुत प्रभावित किया है।"
"अब हम बस यह सोच रहे हैं कि पैसा कैसे बनाया जाए"
उन्होंने बताया कि अब होता यह है कि जब आप कोई फिल्म बना रहे होते हो तो आप यह सोच रहे होते हो कि पब्लिक को बेवकूफ कैसे बनाया जाए ताकि वो आपकी ट्रिक्स में फंसकर थिएटर तक आए और पहले दिन की कमाई 10 करोड़ या उससे ज्यादा हो सके। मनोज बाजपेयी ने कहा, "यह कुछ ऐसा है कि हमारी प्राथमिकताएं पूरी तरह बदल गई हैं। हम बस अब यह सोच रहे हैं कि पैसा कैसे बनाया जाए।"
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