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सूख रहे हैं दुनिया के सबसे ज्यादा बारिश वाले स्थान, मासिनराम में पानी कमी; नहीं बन पा रही बिजली

दुनियाभर में सबसे ज्यादा वर्षा होने के लिए प्रसिद्ध मेघालय के मासिनराम और चेरापूंजी में सूखे जैसी स्थिति आ गई है। बारिश कम होने की वजह से यहां बिजली नहीं बन पा रही है।

Himanshu Tiwari डेविड लैटफ्लांग, हिन्दुस्तान टाइम्स, नई दिल्लीWed, 7 June 2023 05:39 PM
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सूख रहे हैं दुनिया के सबसे ज्यादा बारिश वाले स्थान, मासिनराम में पानी कमी; नहीं बन पा रही बिजली

दुनियाभर में सबसे ज्यादा वर्षा होने के लिए प्रसिद्ध मेघालय के मासिनराम और चेरापूंजी में सूखे जैसी स्थिति आ गई है। इसके अलावा 52 सालों में पहली बार यहां बिजली की किल्लत देखी जा रही है। मासिनराम और चेरापूंजी में सबसे ज्यादा बारिश होती है। सालाना मासिनराम में जहां  11,871 मिमी बारिश होती है वहीं इससे 15 किलोमीटर दूर चेरापूंजी में 11,777 मिमी की वार्षिक औसतन बारिश होती है। चिंता की बात ये है कि पिछले कुछ सालों में बारिश में भारी गिरावट की वजह से यहां पानी की कमी हो गई है। जिसका असर यहां के बिजली उत्पादन पर पड़ा है। मेघालय में बिजली का मुख्य स्रोत जल विद्युत है, जो बारिश के पानी के ऊपर ही निर्भर है।

इसकी पुष्टि किसी और ने नहीं बल्कि मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने खुद की है। उन्होंने स्वीकार किया कि अगर स्थिति ऐसी ही बनी रही तो राज्य के लिए मुश्किल दिन आने वाले हैं। संगमा ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से हमारे यहां उतनी बारिश नहीं हुई है और यदि स्थिति जारी रहती है तो मेघालय को और अधिक कठिन समय का सामना करना होगा।

संगमा ने खुलासा किया कि मेघालय अपने नागरिकों के लिए बिजली खरीदने के लिए हर दिन 3 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि खर्च कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर यह स्थिति और 100 दिनों तक बनी रहती है, तो बिजली खरीदने के लिए सरकार को अतिरिक्त 300 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे, ताकि लोड-शेडिंग न हो सके। उन्होंने खुलासा किया, "पिछले दो सालों में और इस साल, हम बिजली की खरीद सहित विभिन्न खर्चों के भुगतान के लिए औसतन लगभग 600 करोड़ रुपये राज्य के राजस्व खर्च कर रहे हैं।"

9 घंटे गुल हो रही बिजली
मौजूदा वक्त में मेघालय के अधिकांश हिस्सों में रोजाना कम से कम 9 घंटे बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। संगमा ने कहा, "हम यह सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं कि लोड शेडिंग इससे आगे न बढ़े और जाहिर तौर पर बारिश से स्थिति में सुधार होगा।" सीएम संगमा ने कहा, "हमें इस बात का एहसास होना चाहिए कि यह एक कठिन स्थिति है, और हम इसे अभी तक स्थिर रखने के लिए अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं और उम्मीद है कि जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे, हम चीजों को कम करने में सक्षम होंगे। सरकार अपनी क्षमता के अनुसार सब कुछ कर रही है।"

नहीं बन पा रही बिजली
मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि अगले 2-3 सालों में राज्य को सौर और थर्मल पावर से अधिक बिजली इनपुट देखने को मिलेंगे, जो राज्य की बिजली की खपत को पूरा करेगी उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि हम राज्य में थर्मल पावर प्लांट शुरू करने में सक्षम होंगे जो राज्य में बिजली संकट के मुद्दे को हल करने के लिए एक दीर्घकालिक समाधान होगा।" यहां तक ​​कि बिजली मंत्री अबू ताहेर मंडल ने भी चिंता के इस मुद्दे पर इसी तरह की भावना व्यक्त की है। इस बारे में उनका कहना है कि सरकार समग्र रूप से इससे जुड़े निदान की कोशिश कर रही है। उन्होंने बताया कि अपर्याप्त वर्षा के कारण राज्य के मुख्य जलाशय उमियम झील ने राज्य के इतिहास में सबसे कम जल स्तर देखा गया है और इसलिए पर्याप्त बिजली उत्पादन संभव नहीं हो पाया।
 

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