महिला आरक्षण बिल के बहाने सोनिया गांधी ने रख दिया INDIA का एजेंडा, समझें- सियासी चाल
INDIA गठबंधन को ऐसा लगता है कि जातीय जनगणना की मांग करने और महिला आरक्षण बिल में एससी,एसटी, अल्पसंख्यक और OBC महिलाओं को कोटा के अंदर कोटा देने की मांग करने से समाज का बड़ा तबका उसकी तरफ आ सकता है।

Women Reservation Bill Debate: महिला आरक्षण बिल पर आज लोकसभा में चर्चा के बीच कांग्रस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने 'नारीशक्ति वंदन विधेयक' का समर्थन किया और सरकार से अनुरोध किया कि जाति आधारित जनगणना करा कर विधेयक में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के साथ ही अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) की महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था की जाए।
उन्होंने लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने के प्रावधान वाले 128वें संविधान संशोधन विधेयक, 2023 पर यह भी कहा कि कानून बनने के साथ इसे जल्द से जल्द लागू किया जाए क्योंकि इसे लागू करने में देरी भारत की महिलाओं के साथ घोर नाइंसाफी होगी। सोनिया गांधी ने कहा कि ये बिल मेरे जीवनसाथी राजीव गांधी का सपना है और खुद मेरी जिंदगी का मार्मिक क्षण है।
INDIA का एजेंडा किया पेश
इसके साथ ही उन्होंने 2024 से पहले BJP द्वारा फेंके गए इस महिला आरक्षण कार्ड का एक तरफ श्रेय लेने की कोशिश की तो दूसरी तरफ उन्होंने कहा कि बिना एससी-एसटी और ओबीसी कैटगरी के महिलाओं को इसमें लाभ दिए बिना ये पहल कारगर नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत जातीय जनगणना करवाकर इन वंचित वर्गों के लिए भी इस बिल में आरक्षण का प्रावधान किया जाए।
जातीय जनगणना की मांग क्यों?
INDIA गठबंधन के अधिकांश दल (कांग्रेस, राजद, जेडीयू, सपा, एनसीपी, झामुमो समेत डीएमके और अन्य) जातीय जनगणना की मांग लंबे समय से करते रहे हैं। INDIA गठबंधन की बैठकों में भी इस पर चर्चा हो चुकी है कि किन मुद्दों पर बीजेपी सरकार और एनडीए गठबंधन को घेरा जा सकता है। उनमें जातीय जनगणना अहम है। 28 दलों के गठबंधन को ऐसा लगता है कि जातीय जनगणना की मांग करने और महिला आरक्षण बिल में एससी,एसटी, अल्पसंख्यक और ओबीसी महिलाओं को कोटा के अंदर कोटा देने की मांग करने से समाज का बड़ा तबका (वोट बैंक) उसकी तरफ आ सकता है।
2024 की लड़ाई SC/ST, OBC पर आई
कई चुनावी विश्लेषणों में ये बात सामने आ चुकी है कि 2014 और 2019 के आम चुनावों में ओबीसी और दलित समुदाय ने परंपरागत दलों के वोट बैंक से खिसककर बीजेपी को वोट दिया था, जिसकी वजह से बीजेपी और एनडीए गठबंधन की दोनों चुनावों में बंपर जीत हुई है। एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद को ओबीसी चेहरा कहते रहे हैं।
वहीं दूसरी तरफ बीजेपी ने कई क्षेत्रीय ओबीसी छत्रपों को अपने साथ कर उनका वोट खींचा है और अभी भी इस कोशिश में लगी है। दूसरी तरफ, कांग्रेस और उसकी अगुवाई वाले गठबंधन के घटक दल लगातार उस वोट बैंक पर फिर से कब्जा पाने के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं। इसी कड़ी में INDIA गठबंधन के दल सभी सियासी लड़ाई को बीजेपी बनाम एससी-एसटी और ओबीसी की लड़ाई बनाने में जुटे हैं।
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