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बीजेपी के ही नारे से राजस्थान के सियासी मौदान में उतरेगी कांग्रेस, क्यों आई ऐसी नौबत?

राजस्थान में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं। जनता की सरकार बदल देने की रोटेशन पॉलिसी को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने बीजेपी के हिमाचल प्रदेश वाले नारे से चुनाव में उतरने का फैसला किया है।

Himanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीThu, 1 June 2023 07:59 PM
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बीजेपी के ही नारे से राजस्थान के सियासी मौदान में उतरेगी कांग्रेस, क्यों आई ऐसी नौबत?

राजस्थान राजस्थान इस साल के अंत में चुनाव होने वाले हैं। मौजूदा कांग्रेस सरकार सत्ता में वापस आने के लिए स्थानीय लोगों को लुभावन वादे कर रही है, इसके अलावा हर पांच साल में अपनी सरकार बदल देने वाली जनता के सामने बीजेपी का हिमाचल में इस्तेमाल किया गया फॉर्मूला लेकर आ रही हैं। बीजेपी ने पिछले साल नवंबर-दिसंबर में हिमाचल प्रदेश में मुख्य नारे - "सरकार नहीं, रिवाज बदलेंगे" के साथ चुनाव लड़ा था। इसी नारे के साथ गहलोत सरकार वापस से राजस्थान में सत्ता के अंदर आना चाहती है। राजस्थान की तरह हिमाचल प्रदेश की जनता सरकार का रोटेशन करती आई है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने वहां इस नारे के साथ चुनाव लड़ा था। सरकार बदल जाने की आशंका में कांग्रेस भी बीजेपी के हिमाचल वाले नारे के साथ चुनाव लड़ना चाहती है।

1971 में एक राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। पहला विधानसभा चुनाव 1972 में कांग्रेस के सत्ता में आने और यशवंत सिंह परमार के राज्य के पहले मुख्यमंत्री बनने के साथ हुआ। 1977 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जगह जनता पार्टी ने ले ली और शांता कुमार पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने। तब से, राज्य ने हर चुनाव में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच सत्ता का रोटेशन देखा है। पिछले साल के चुनाव से पहले, जयराम ठाकुर के मुख्यमंत्री रहने के दौरान भाजपा ने जनता की इस रोटेशन पॉलिसी को तोड़ने की कोशिश की थी। जिसके लिए बीजेपी भी जनता के सामने 'सरकार नहीं, रिवाज बदलेंगे' का नारा दिया। हालांकि, हिमाचल प्रदेश में यह प्रथा एक बार फिर से जारी रही और कांग्रेस ने भाजपा की जगह ले ली और सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य के सीएम के रूप में बागडोर संभाली। राजस्थान में कांग्रेस भी इस प्रथा को तोड़ने के लिए इस नारे के साथ जनता के बीच में आना चाहती है। 

1952 में पहले विधानसभा चुनाव से 1977 तक राजस्थान में कांग्रेस सत्ता में थी। इसके बाद जनता पार्टी ने केंद्र में इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार की जगह ली। 1993 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मुख्यमंत्री के रूप में भैरों सिंह शेखावत के साथ सरकार बनाई। उसके बाद से अब तक पांच विधानसभा चुनाव हो चुके हैं और हर बार कांग्रेस और बीजेपी के बीच सत्ता बदलती रही है। अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस अपना कार्यकाल पूरा करने के लिए तैयार है और राज्य एक और चुनाव के लिए तैयार हो रहा है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पुष्कर में भगवान ब्रह्मा के मंदिर में दर्शन करने के बाद अजमेर में एक जनसभा को संबोधित कर चुनावी बिगुल फूंका।

भाजपा अन्य कारकों के साथ-साथ सरकार के रोटेशन प्रथा के आधार पर सत्ता में वापसी को लेकर आशान्वित है, जैसा कि पिछले साल हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने किया था। जिस तरह भाजपा ने हिमाचल प्रदेश में चुनाव जीतने की कोशिश की थी, वैसे ही कांग्रेस राजस्थान में करना चाहती है। कांग्रेस बारी-बारी से सरकार के इस चक्र को तोड़ना चाहती है। कांग्रेस ने एक नया नारा गढ़ने के बजाय, हिमाचल प्रदेश में भाजपा के नारे को ही उधार लिया है।

27 मई को जोधपुर में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता अलका लांबा ने कहा, "मैं तीन महीने तक हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव की मीडिया प्रभारी रही। मैंने वहां पहाड़ियों से लेकर घाटियों तक काम किया। वहां बीजेपी का नारा था, 'सरकार नहीं, रिवाज बदलेंगे' क्योंकि वहां बीजेपी और कांग्रेस की सरकारें हर पांच साल में बदल जाती थीं।" उन्होंने कहा कि राजस्थान के लोग इस प्रथा को बदलना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि (गहलोत) सरकार और उसके काम जैसे कि 500 रुपये में एलपीजी सिलेंडर देना, जारी रहे।

कांग्रेस नेता ने कहा, "अब हम यहां राजस्थान में भाजपा का हिमाचल प्रदेश चुनावी नारा दे रहे हैं। वे (भाजपा) हिमाचल प्रदेश में सफल नहीं हुए। लेकिन राजस्थान में कांग्रेस को सफलता मिलेगी। यहां कांग्रेस का नारा है: 'सरकार नहीं, रिवाज बदलेंगे'।" हालांकि भाजपा हिमाचल प्रदेश में इस प्रथा को बदलने में विफल रही, क्या राजस्थान में कांग्रेस इसमें सफल होगी?

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