मणिपुर के बाद अब मेघालय में बवाल का डर, आरक्षण पर बढ़ी रार; 17 मई को धरना
मेघालय में आरक्षण का मुद्दा गरमाने लगा है। विपक्षी दल वॉयस ऑफ द पीपुल्स पार्टी (वीपीपी) ने 17 मई को प्रदेश में धरना-प्रदर्शन करने की घोषणा की है। वीपीपी प्रवक्ता डॉ. बट्सखेम मिरबोह ने यह जानकारी दी।

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में बवाल के बाद अब मेघालय में भी माहौल गरमाने लगा है। यहां पर मामला है आरक्षण का। इसको लेकर विपक्षी दल वॉयस ऑफ द पीपुल्स पार्टी (वीपीपी) ने 17 मई को प्रदेश में धरना-प्रदर्शन करने की घोषणा की है। असल में वीपीपी ने आरक्षण नीति की समीक्षा होने तक प्रदेश में सभी भर्ती प्रक्रियाओं को स्थगित करने की मांग की थी। लेकिन प्रदेश सरकार की तरफ से इसको लेकर कोई पॉजिटिव रिस्पांस न मिलता देख पार्टी ने विरोध का फैसला किया है। वीपीपी के प्रवक्ता डॉ. बट्सखेम मिरबोह ने यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी।
कहा-खत्म हुआ अल्टीमेटम
वीपीपी के प्रवक्ता मिरबोह के मुताबिक पार्टी ने प्रदेश में सभी भर्ती प्रक्रियाओं को रोकने की मांग की थी। हमने कहा था कि राज्य नौकरी आरक्षण नीति और रोस्टर प्रणाली कार्यान्वयन की एक्सपर्ट कमेटी द्वारा रिव्यू किए जाने तक तक इसे स्थगित किया जाए। लेकिन इसको लेकर एनपीपी के नेतृत्व वाली एमडीए 2.0 सरकार का रवैया अड़ियल है। इसको लेकर पार्टी बुधवार, 17 मई, 2023 को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक अतिरिक्त सचिवालय के पास पार्किंग स्थल पर धरना-प्रदर्शन आयोजित करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को दिए गए अल्टीमेटम की समयसीमा सोमवार को खत्म हो गई। इसके बाद यह फैसला लिया गया है। मिरबोह ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता से एनपीपी के नेतृत्व वाली सरकार पर दबाव बनाने के लिए विरोध प्रदर्शन में भाग लेने का आग्रह किया जाता है।
सीएम को सौंपा था पत्र
12 मई को वीपीपी ने मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा को एक पत्र सौंपा था। यह पत्र एडिशनल सेक्रेट्रिएट के पास पार्किंग स्थल पर हुई सार्वजनिक बैठक के बाद सौंपा गया। बैठक के दौरान वीपीपी प्रमुख एर्ट एम बसैयावमोइट ने कहा था कि पार्टी के पास भर्ती प्रक्रिया को रोकने के लिए सरकार के अड़ियल रवैये के खिलाफ आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि यह सरकार को दूसरा पत्र है। पहले पत्र में सरकार से इस सेंसिटिव मुद्दे पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाने के लिए लिखा गया था। इस पर कोई जवाब नहीं मिला था। वीपीपी चीफ ने खुलेआम यह स्पष्ट किया कि समस्या रोस्टर सिस्टम के साथ नहीं, बल्कि पूरी पॉलिसी के साथ है। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि प्रदेश का पॉपुलेशन स्ट्रक्चर समझा जाए। आपको यह देखने की जरूरत है कि खासी-जयंतिया की आबादी गारो हिल्स की आबादी से अधिक है। ऐसे आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि नीति दोनों के बीच समान रूप से आरक्षित होगी।
खासी और गारो के लिए
बसैयावमोइट ने यह भी कहा कि वीपीपी की लड़ाई खासी और गारो दोनों के फायदे के लिए है। उन्होंने कहा कि जब हम आरक्षण के लिए लड़ते हैं तो यह इसका मतलब यह नहीं है कि हम केवल अपने लिए लड़ें। हम इसलिए लड़ते हैं ताकि यह आरक्षण इन दोनों समुदायों के लिए न्यायपूर्ण और उचित हो। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान आरक्षण नीति राज्य के गैर-निवासियों को कई मौके दे रही है। पीपीपी चीफ ने कहा कि
जैसा कि हम जानते हैं, वर्तमान नीति का फायदा बाहर की जनजातियों को भी मिलता है। इसलिए यह आरक्षण नीति मेघालय के गारो और खासी लोगों के लिए होनी चाहिए, न कि किसी अन्य राज्यों से आने वाली किसी अन्य जनजाति के लिए। इसलिए, यह उनकी भलाई के लिए है कि हम इस मुद्दे पर समाधान लाने की कोशिश कर रहे हैं।
सरकार ने दिया यह जवाब
वीपीपी की धमकी के जवाब में कैबिनेट मंत्री एम अम्परीन लिंगदोह ने कहा कि सरकार रोस्टर प्रणाली और आरक्षण नीति को लेकर किसी भी तरफ से दबाव में नहीं आएगी। लिंगदोह ने कहा कि एमडीए सरकार सरकार के सभी सहयोगियों, अन्य राजनीतिक दलों, गैर सरकारी संगठनों और छात्र निकायों के साथ चर्चा करने की कोशिश कर रही है। इस मामले को बेहद संवेदनशील बताते हुए उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष के सदस्य सरकार पर दबाव बनाना चाहते हैं तो ठीक है, लेकिन सरकार इस मामले को आगे बढ़ाने के तरीके पर फैसला करने में अपना समय लेगी। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे से भाग नहीं रही है, बल्कि सभी से सुझाव मांगेगी और सभी को साथ रखेगी।
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