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चारा घोटाला: 1996 से मुकदमे का सामना कर रहे लालू प्रसाद, सुप्रीम कोर्ट जाएगी सीबीआई

25 जुलाई 1997 को विशेष अदालत द्वारा गिरफ्तारी का वारंट निर्गत होने पर उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। लालू प्रसाद को चारा घोटाले के पांच मामलों में सजा हुई है। सीबीआई सुप्रीम कोर्ट जाएगी।

Sudhir Kumar प्रमुख संवाददाता, रांचीSat, 23 April 2022 07:33 AM
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चारा घोटाला: 1996 से मुकदमे का सामना कर रहे लालू प्रसाद, सुप्रीम कोर्ट जाएगी सीबीआई

लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले के मामले में वर्ष 1996 से मुकदमे का सामना कर रहे हैं। इसी साल पटना हाईकोर्ट की निगरानी में चारा घोटाला की सीबीआइ जांच शुरू हुई थी। इस जांच ने 30 जुलाई 1997 को उनके पटना की विशेष अदालत में सरेंडर और जेल जाने की पटकथा लिखी थी। इसके पहले 25 जुलाई 1997 को विशेष अदालत द्वारा गिरफ्तारी का वारंट निर्गत होने पर उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। लालू प्रसाद को चारा घोटाले के पांच मामलों में सजा हुई है। अभी तक लालू प्रसाद को मिली सजा को जोड़ दें तो पांच मामले में उन्हें 32.5 साल की सजा हो चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट जाएगी सीबीआई, पहले ही लालू को मिला है नोटिस


डोरंडा कोषागार में लालू प्रसाद के आधी सजा काटने पर जमानत देने के विरोध में सीबीआई सुप्रीम कोर्ट जाएगी। सीबीआई का कहना है कि लालू प्रसाद ने इस मामले में आधी सजा पूरी नहीं की है। उनकी सजा की गणना सही तरीके से नहीं की गयी है। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएगी। इसके पहले भी सीबीआई ने दुमका और चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी मामले में जमानत रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस पर लालू प्रसाद को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

चार मामले में अलग अलग सजा

लालू प्रसाद को चार मामले में अलग-अलग सजा हुई है। लेकिन सीबीआई कोर्ट ने सभी सजा एक साथ चलाने का आदेश नहीं दिया है। इस कारण सभी सजा एक साथ नहीं चल सकती। सीआरपीसी की धारा 427 में प्रावधान के अनुसार किसी व्यक्ति को एक से अधिक मामलों में दोषी करार देकर सजा सुनायी जाती है और अदालत सभी सजा एक साथ चलाने का आदेश नहीं देती है, तो उस व्यक्ति की एक सजा की अवधि समाप्त होने के बाद ही उसकी दूसरी सजा शुरू होगी। दुमका कोषागार मामले में उन्हें रिमांड में लेने में विलंब किया गया है। जब तक रिमांड में नहीं लिया जाता तब तक दूसरे मामले की सजा की गणना नहीं की जा सकती। इसके समर्थन में सीबीआई की ओर से लालू प्रसाद के सभी मामलों के आदेश की कॉपी और संबंधित दस्तावेज भी पेश किए गए हैं।

सीबीआई की ओर से दलील दी गयी है कि दुमका कोषागार मामले में सीबीआई कोर्ट ने दो धाराओं में सात-सात साल की सजा दी है। आदेश में यह भी स्पष्ट है कि दोनों सजा अलग-अलग चलेगी। ऐसे में दुमका कोषागार मामले में लालू प्रसाद के सात साल जेल में रहने के बाद ही आधी अवधि मानी जाएगी। ऐसे में लालू प्रसाद का आधी सजा काटने का दावा सही नहीं है और उन्हें जमानत नहीं मिलनी चाहिए।


लालू प्रसाद की सजा बढ़ाने का मामला हाईकोर्ट में है लंबित

देवघर कोषागार से अवैध निकासी के मामले में लालू प्रसाद को सीबीआई कोर्ट से मिली साढ़े तीन साल की सजा की अवधि बढ़ाने का मामला भी झारखंड हाईकोर्ट में अभी लंबित है। सीबीआई कोर्ट ने लालू प्रसाद समेत इस मामले के अन्य आरोपी आरके राणा (अब मृत) बेक जूलियस, महेश प्रसाद, फूलचंद सिंह और सुबीर कुमार भट्टाचार्य को साढ़े तीन साल की सजा सुनायी है। जबकि एक आरोपी जगदीश शर्मा को इसी मामले में सात साल की सजा मिली है। सीबीआई की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा गया कि चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद सहित अन्य पर उच्च-स्तरीय षडयंत्र का आरोप है, ऐसे में सजा भी समान होनी चाहिए। अर्थात सीबीआई ने इस मामले में लालू यादव समेत छह अन्य आरोपियों को भी कम से कम सात वर्ष सश्रम कारावास की सजा दिए जाने की मांग की है। इस मामले में अभी तक हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू नहीं हो सकी है। कुछ माह पहले यह मामला हाईकोर्ट के खंडपीठ में सूचीबद्ध हुई थी, लेकिन खंडपीठ के एक जज ने इस मामले से खुद को अलग रखते हुए सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद यह मामला दूसरी बेंच में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद से यह मामला हाईकोर्ट में लंबित है।

इन मामलों में हो चुकी है सजा


● चारा घोटाला के पहले मामले में लालू को पांच साल की सजा हुई थी। उनपर 25 लाख का जुर्माना भी लगाया गया था। पहला मामला चाईबासा कोषागार से अवैध तरीके से 37.7 करोड़ रुपये की निकासी का था।

● चारा घोटाले से जुड़ा दूसरा मामला देवघर कोषागार से 84.53 लाख रुपये की अवैध निकासी का था, जिसमें लालू प्रसाद को साढ़े तीन साल की सजा हुई थी। उनपर पांच लाख का जुर्माना भी लगाया गया था।

● चाईबासा कोषागार से 33.67 करोड़ रुपये की अवैध निकासी के चारा घोटाला के तीसरे मामले में लालू प्रसाद यादव को पांच साल की सजा सुनाई गई थी। उनपर 10 लाख का जुर्माना भी लगाया गया था।

● चारा घोटाला का चौथा मामला दुमका कोषागार से 3.13 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का था, जिसमें लालू को दो अलग-अलग धाराओं में सात-सात साल की सजा दी गई। साथ ही 60 लाख का जुर्माना भी लगाया गया।

● चारा घोटाला के डोरंडा कांषागार के पांचवें मामले में पांच साल की सजा दी गई है। साथ ही 60 लाख रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है।