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कुत्ता टहलाने वाले नौकर को 30000 और शिक्षामित्रों को केवल 10000, सपा की टिप्पणी पर सत्ता पक्ष का हंगामा

शिक्षामित्रों की हालत बयां करते हुए सपा विधायक ने ऐसी बातें बोल दीं जिससे सदन में हंगामा मच गया। सत्ता पक्ष ने इसे शिक्षामित्रों का अपमान करार दिया। मंत्री ने भी इसकी निंदा की, हालांकि शिक्षामित्रों का मानदेय भी फिलहाल नहीं बढ़ने की भी बात कही।

Yogesh Yadav हिन्दुस्तान, लखनऊ, विशेष संवाददाताTue, 25 Feb 2025 08:47 PM
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कुत्ता टहलाने वाले नौकर को 30000 और शिक्षामित्रों को केवल 10000, सपा की टिप्पणी पर सत्ता पक्ष का हंगामा

विधानसभा सत्र के छठे दिन शिक्षामित्रों को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने सपा विधायक द्वारा शिक्षामित्रों की तुलना पशु पालने वाले नौकर से किए जाने को शर्मनाक करार देते हुए कड़ी आपत्ति जताई। मंत्री ने शिक्षा मित्रों के सम्मान और कल्याण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई और कहा कि शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाने का फिलहाल कोई विचार नहीं है। विपक्ष को इस गलती के लिए शिक्षामित्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

प्रतापगढ़ की रानीगंज विधानसभा से सपा विधायक डॉ आरके वर्मा ने प्रश्न प्रहर में कहा कि शिक्षामित्रों को 40 हजार रुपये व अनुदेशकों को 30 हजार रुपये और रसोइयां को 20 हजार रुपये मानदेय दिया जाए। डॉ. वर्मा ने पूछा कि आप अपने नौकर को जो आपके कुत्तों की सैर करता है, उसे 30 हजार रुपये की तनख्वाह देते हो और जो शिक्षामित्र देश के नौनिहालों को देश का कर्णधार बनता है, उसे 10 हजार रुपये देते हैं। यह कहां का न्याय है। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत करते हुए 24 वर्ष से शिक्षामित्र प्राथमिक विद्यालयों में न्यूनतम वेतन पर कार्य कर रहे हैं। महंगाई के दौर में कम वेतन पाने पर उनके परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।

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डा. वर्मा द्वारा शिक्षामित्रों की तुलना पशुओं को टहलाने वाले नौकर से किए जाने पर सत्तापक्ष ने शोर-शराबा शुरू कर दिया। इस आपत्तिजनक टिप्पणी पर सत्ता पक्ष के विधायकों ने कड़ा विरोध जताया। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने इसे शिक्षामित्रों का अपमान करार देते हुए कहा कि सपा का इतिहास ही शिक्षामित्रों के प्रति असंवेदनशीलता का रहा है।

उन्होंने कहा, 'यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने शिक्षामित्रों का अपमान किया हो। पहले भी सपा शासनकाल में शिक्षामित्रों की अनदेखी की गई थी। विपक्ष को शिक्षामित्रों से सदन में खड़े होकर माफी मांगनी चाहिए।' उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षामित्रों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस तरह के अपमानजनक बयान कतई बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।

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