Maldives returned precious gift of India ALH Dhruva under influence of Pakistan-China under Abdullah yameen regime - India Hindi News मुस्लिम देश के बहकावे में आ मालदीव ने लौटा दिया था भारत का अनमोल उपहार, किस बात का सता रहा था डर? , India Hindi News - Hindustan
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मुस्लिम देश के बहकावे में आ मालदीव ने लौटा दिया था भारत का अनमोल उपहार, किस बात का सता रहा था डर? 

Maldives India Relation: भारत ने  फास्ट-अटैक क्राफ्ट उपहार देने के अलावा, एएलएच को संचालित करने और मालदीव के राष्ट्रीय रक्षा बलों की मदद के लिए 6 पायलट और एक दर्जन से अधिक सैनिकों को भी तैनात किया था।

Pramod Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीFri, 12 Jan 2024 10:25 AM
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मुस्लिम देश के बहकावे में आ मालदीव ने लौटा दिया था भारत का अनमोल उपहार, किस बात का सता रहा था डर? 

भारत-मालदीव के बीच बिगड़ते राजनयिक रिश्तों के बीच अब दोनों देशों के बीच पुराने मैत्रीपूर्ण रिश्तों की पड़ताल होने लगी है, जो मुइज्जू के शासन से छह दशक पुराना है। 1965 में जब मालदीव को अंग्रेजी उपनिवेश से आजादी मिली तो भारत ऐसा पहला देश था, जिसने उसे एक स्वतंत्र देश का दर्जा दिया था। 1980 में भारत ने वहां अपना दूतावास खोला। भारत के इस कदम के करीब 30 साल बाद चीन ने 2011 में मालदीव में अपने राजनयिक केंद्र की स्थापना की लेकिन जैसे ही चीन ने मालदीव से दोस्ती की, मालदीव और भारत के रिश्ते बिगड़ने लगे। 

प्रो-इंडिया से प्रो-चाइना हुआ मालदीव
नवंबर 2013 में अब्दुल्ला यामीन मालदीव के नए राष्ट्रपति बने। यामीन का झुकाव चीन की तरफ था। उनकी सरकार में चीन की कूटनीति खूब फली। उनके ही शासनकाल में माले ने बीजिंग के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किया और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव में शामिल हो गया। इस समझौते ने चीन को मालदीव के द्वीपों को पट्टे पर देने और देश में बीजिंग को आर्थिक और कूटनीतिक रूप से सक्रिय भूमिका निभाने की अनुमति दे दी। इस मौके का फायदा उठाते हुए चीन ने माले में बेतहाशा पैसे खर्च किए और मालदीव पर विकास के नाम पर भारी-भरकम कर्ज लाद दिया। यामीन की सरकार में मालदीव प्रो-इंडिया से प्रो-चाइना हो गया।

आंकड़ों पर गौर करें तो अंगोला और जिबूती के बाद, मालदीव चीन का तीसरा सबसे बड़ा कर्ज़दार है। इस छोटे से द्वीपीय देश पर चीन की इतनी राशि बकाया है जो उसकी जीडीपी का लगभग 30 प्रतिशत के बराबर है। इसमें से अधिकांश यामीन प्रशासन के दौरान का कर्ज है, जब चीन के इशारे पर यामीन सरकार नाच रही थी।

मालदीव में इमरजेंसी
अर्थसास्त्री कहे जाने वाले राष्ट्रपति यामीन के फैसलों से मालदीव में भारी विरोध होना शुरू हो गया। विपक्षी दलों ने वहां खूब हंगामा किया और चीन से प्रेरित नीति को खारिज करने की मांग की। जब यामीन सरकार ने ऐसा करने से इनकार कर दिया तो लोग सड़कों पर उतर आए। इससे बौखलाए अब्दुल्ला यामीन ने राजनीतिक विरोधियों को जेल में डाल दिया। जब फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद नेताओं को रिहा करने का आदेश दिया तो फैसला सुनाने वाले जज को भी जेल में डाल दिया गया और देश में इमरजेंसी की घोषणा कर दी गई। 

पाकिस्तान और चीन ने मिलकर रची साजिश
45 दिनों के बाद जब मार्च में आपातकाल हटा तो पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा पहले ऐसे विदेशी शख्स थे, जो माले पहुंचे थे। पाकिस्तान ने भी इस मौके का फायदा उठाया और भारत के खिलाफ साजिश रचते हुए मालदीव को इस बात के लिए डराया कि उसके नेवी हेलीकॉप्टर से मालदीव की सुरक्षा को खतरा है। दूसरी तरफ चीन ने भी मालदीव पर इसके लिए दबाव बनाया। उस वक्त यामीन को अपनी सरकार जाने का डर सताने लगा था।

नेवी का ध्रुव हेलीकॉप्टर लौटाया था
यामीन सरकार 2013 से 2018 तक रही लेकिन उनकी सरकार की विदाई से पहले दोनों देशों के बीच रिश्ते तेजी से बिगड़े। अप्रैल 2018 तक आते-आते स्थिति इतनी बिगड़ी कि यामीन सरकार ने भारत से उपहार में दिए गए नेवी के दो ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) को वापस लेने को कह दिया। दरअसल, भारत ने समुद्री इलाके की निगरानी के लिए दो ध्रुव हेलीकॉप्टर मालदीव को उपहार के तौर पर दिए थे। इनमें से एक 2010 में तो दूसरा 2013 में दिए गए थे।

मालदीव ने जिस हेलीकॉप्टर को वापस लेने को कहा था, वह अडु एटॉल पर तैनात था। यह द्वीप मालदीव का सबसे दक्षिणी द्वीप है, जो सामरिक लिहाज से हिन्द महासागर में निगरानी के लिए काफी मायने रखता है। दूसरा हेलीकॉप्टर लामू एटॉल पर तैनात था। दक्षिणी मालदीव में लामू एक संवेदनशील स्थान रहा है क्योंकि चीन वहां पर तब बंदरगाह बनाने पर विचार कर रहा था।

चीन पर कड़ी नजर रखते हुए भारत ने तब लगातार कई वर्षों तक मालदीव में सैन्य सहायता, प्रशिक्षण और "क्षमता निर्माण" में भारी निवेश किया था। भारत ने  फास्ट-अटैक क्राफ्ट उपहार देने के अलावा, एएलएच को संचालित करने और मालदीव के राष्ट्रीय रक्षा बलों की मदद के लिए छह पायलट और एक दर्जन से अधिक जमीनी कर्मियों को भी तैनात किया था। उस वक्त मालदीव पाकिस्तान, चीन के अलावा सऊदी अरब के भी संपर्क में था।

मालदीव में बड़ी संख्या में भारतीय
बता दें कि यामीन सरकार से पहले तक दोनों देशों के बीच रिश्ते काफी मधुर रहे हैं। मालदीव को सजाने-संवारने से लेकर वहां पीने का पानी तक भारत मुहैया कराता रहा है। वहां 25000 के करीब भारतीय अभी भी रहते हैं, जो मालदीव को सजाने-संवारने में लगे हैं। भारतीय समुदाय के लोग वहां डॉक्टर, टीचर, अकाउंटेंट, मैनेजर, इंजीनियर, नर्स और अन्य टैक्नीशियन पेशे से जुड़े हैं।  भारतीय एक्सपर्ट्स का ये समुदाय आमतौर पर मालदीव की राजधानी माले में रहता है। मालदीव में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों में से 25 फीसदी स्कूल से लेकर कॉलेज तक पढ़ाते हैं।

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