UCC पर क्यों नहीं बोल रही है कांग्रेस, शशि थरूर ने बताया आखिर किस बात की चिंता
थरूर ने कहा है कि हमें डर है कि लोगों के अधिकारों का हनन हो सकता है। इसके अलावा सरकार की तरफ से अभी तक ड्राफ्ट भी नहीं सामने आया है। इससे पहले सचिन पायलट ने भी समान नागरिक संहिता को गुगली बताया है।

यूसीसी पर कांग्रेस का रुख क्या है, इसको लेकर बहुत स्पष्टता नहीं है। इस बीच वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर ने यूसीसी पर कांग्रेस की सोच के बारे में बयान दिया है। थरूर ने कहा है कि हमें डर है कि लोगों के अधिकारों का हनन हो सकता है। इसके अलावा सरकार की तरफ से अभी तक ड्राफ्ट भी नहीं सामने आया है। थरूर ने कहा कि जब तक सरकार यूसीसी का ड्राफ्ट लेकर सामने नहीं आती है, तब तक कांग्रेस की तरफ से इस पर कोई टिप्पणी नहीं की जाएगी।
जब तक ड्राफ्ट नहीं आता
शशि थरूर ने कहा कि यूससीसी को लेकर एक चिंता है जो डर का आधार है कि विभिन्न समुदाय द्वारा मिले अधिकारों का हनन हो सकता है। हमें पहले यह देखना है कि आखिर सरकार का प्रस्ताव क्या है। सरकार ने अभी तक ड्राफ्ट नहीं रखा है और न ही हितधारकों के साथ किसी भी तरह की कोई चर्चा शुरू की है। कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि इसलिए कांग्रेस पार्टी ने फैसला लिया है कि वह तब तक कुछ नहीं कहेगी जब तक ड्राफ्ट सामने नहीं आता। शशि थरूर ने कहा कि हमें हिंदू कोड बिल लाने के लिए भी आजादी के बाद 9 साल लगे। इसलिए लोगों को समझाने में समय लगता है।
पायलट ने बताया कि गुगली
गौरतलब है कि इससे पूर्व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने कहा कि बिना किसी ठोस प्रस्ताव के इस पर बात करना ‘हवा में तीर चलाने’ जैसा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जनता से जुड़े मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए यह ‘गुगली’ डाली है। पायलट ने यूसीसी पर छिड़ी बहस और इस पर कांग्रेस के रुख के बारे में पूछे जाने पर कहा कि समान नागरिक संहिता क्या है, क्या कोई विधेयक आया है, क्या कोई प्रस्ताव आया है, क्या कोई खाका तैयार किया गया है, पता ही नहीं है। यूसीसी के नाम पर अलग-अलग लोग, अलग-अलग दल, अलग-अलग धर्मगुरु अपनी राय दे रहे हैं।
विधि आयोग ने मांगी है राय
पायलट ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जानबूझकर ध्यान भटकाने का काम करती है, ताकि महंगाई और जनता से जुड़े अन्य मुद्दों पर पर चर्चा नहीं हो। गौरतलब है कि यूसीसी विवाह, तलाक और उत्तराधिकार पर समान कानून लागू करने के लिए है। अमल में आने पर यह देश के सभी नागरिकों पर लागू होगा। धर्म, जाति, समुदाय या स्थानीय परंपराओं के आधार पर कानून में भेदभाव नहीं किया जाएगा। विधि आयोग ने यूसीसी पर लोगों से राय मांगी है।
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