मकानों में भी आरक्षण की मांग, उद्धव गुट बोला- मराठों के लिए हों 50% घर; बिल लाने की तैयारी
लोकसभा में अच्छे नतीजों से उत्साहित शिवसेना (उद्धव ठाकरे) ने अब विधानसभा के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। यही नहीं उद्धव ठाकरे गुट अब चुनाव में मराठा कार्ड चलना चाहता है। इसके लिए बिल की तैयारी है।

लोकसभा चुनाव में अच्छे नतीजों से उत्साहित शिवसेना (उद्धव ठाकरे) ने अब विधानसभा के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। यही नहीं उद्धव ठाकरे गुट अब चुनाव में मराठा कार्ड चलना चाहता है। उसने विधान परिषद में प्राइवेट मेंबर बिल पेश करने का फैसला लिया है, जिसमें मुंबई में बनने वाली नई इमारतों में मराठियों के लिए 50 फीसदी कोटा तय करने की मांग की जाएगी। सदन में बिल पेश करने के लिए फिलहाल डिप्टी चेयरपर्सन से मंजूरी का इंतजार है। बिल में मांग उठाई गई है कि यदि नई बनी सोसायटी में 50 फीसदी मराठा कोटे की शर्त को पूरा नहीं किया जाता है तो फिर बिल्डर पर 10 लाख रुपये तक का फाइन लगे या फिर 6 महीने की कैद की सजा का प्रावधान हो।
महाराष्ट्र विधानपरिषद में कुल 78 सदस्य हैं, जिसमें उद्धव गुट के 9 सदस्य हैं। इसके अलावा विधानसभा में उसके 15 ही विधायक हैं, जहां की संख्या 288 है। बता दें कि विधानपरिषद से लेकर असेंबली तक में एनडीए का बहुमत है। असेंबली में भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए के कुल 212 विधायक हैं। वहीं विधान परिषद में उसके कुल 28 मेंबर हैं। विधान परिषद में प्राइवेट मेंबर बिल उद्धव गुट के नेता अनिल परब लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे तमाम मामले आए हैं, जब मराठी भाषी लोगों को उनकी पहचान और खानपान के आधार पर मकान ही नहीं दिए गए। ऐसी स्थिति चिंताजनक है। ऐसे में हमारी मांग है कि नई बनने वाली सोसायटियों में मराठा समुदाय के लोगों के लिए आरक्षण ही कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि खानपान और धर्म के नाम पर होने वाला किसी भी तरह का भेदभाव असंवैधानिक है।
उन्होंने विले पार्ले की एक सोसायटी का एक जिक्र करते हुए कहा कि बिल्डर ने मराठी लोगों को घर देने से मना कर दिया। इसके लिए उसने मराठी लोगों के खानपान का तर्क दिया था। उन्होंने कहा कि मराठी लोगों ने इसका विरोध भी किया था। लेकिन किसी ने भी इसका संज्ञान नहीं लिया और सरकार ने भी चुप्पी साध ली। इस पर जब मीडिया में मामला उछला तो बिल्डर ने माफी मांगी। उन्होंने कहा कि आज ऐसी स्थिति है कि मुंबई में मराठी बोलने वाले लोगों की संख्या कम हो रही है। बता दें कि दोनों सदनों का कोई भी सदस्य अपने स्तर पर प्राइवेट बिल ला सकता है।