समान नागरिक संहिता-यूसीसी पर जवाब देने को 48 घंटे मांगे, उत्तराखंड सरकार ने नैनीताल हाईकोर्ट से मांगा समय
- मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी नरेंदर और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई। भीमताल निवासी सुरेश सिंह नेगी ने यूसीसी में लिव इन रिलेशनशिप के प्रावधान समेत मुस्लिम, पारसी आदि की वैवाहिक पद्धति की यूसीसी में अनदेखी किए जाने को चुनौती दी है।

नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तराखंड सरकार की ओर से लागू समान नागरिक संहिता (यूसीसी)की संवैधानिकता सहित कानून के प्रवधानों को चुनौती देती याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई की। इस दौरान सरकार की ओर से मामले में जवाब दाखिल करने को 48 घंटे का समय मांगा गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। मामले में अगली सुनवाई अब 10 कार्य दिवसों के बाद होगी।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी नरेंदर और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई। भीमताल निवासी सुरेश सिंह नेगी ने यूसीसी में लिव इन रिलेशनशिप के प्रावधान समेत मुस्लिम, पारसी आदि की वैवाहिक पद्धति की यूसीसी में अनदेखी किए जाने को चुनौती दी है।
देहरादून के एलमसुद्दीन सिद्दीकी ने याचिका दायर कर अल्पसंख्यकों के रीति-रिवाजों की अनदेखी किए जाने का उल्लेख किया है। सुरेश नेगी की याचिका में कहा गया कि जहां सामान्य शादी के लिए लड़के की उम्र 21 और लड़की की 18 वर्ष होनी आवश्यक है, वहीं लिव इन रिलेशनशिप में दोनों की उम्र 18 वर्ष निर्धारित की गई है।
जबकि साधारण विवाह में तलाक लेने के लिए पूरी न्यायिक प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। याचिकाकर्ता का कहना था कि यूसीसी लागू होने के बाद लोग शादी न करके लिव इन रिलेशनशिप में ही रहना पसंद करेंगे। जब तक पार्टनर के साथ संबंध अच्छे हों तब तक रहें, नहीं बनने पर छोड़ दें।
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