जेल से फर्जी जमानत आदेश पर छोड़ दिया बंदी? पूर्व IPS के आरोप पर बनारस में शुरू हुई जांच
- पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर द्वारा लगाए गए इस आरोप पर बनारस में जेल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने सीएम योगी आदित्यनाथ को फर्जी रिहाई आदेश के साथ शिकायती पत्र भेजकर मामले में दोषी अफसरों पर कार्रवाई की मांग की है।
Former IPS Amitabh Thakur: आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने अलीगढ़ निवासी एक बंदी को फर्जी जमानत आदेश पर वाराणसी जिला जेल से छोड़ने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि यह प्रकरण पूर्व अधीक्षक उमेश कुमार सिंह के कार्यकाल का है। इस संबंध में उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ को फर्जी रिहाई आदेश के साथ शिकायती पत्र भेजकर मामले में दोषी अफसरों पर कार्रवाई की मांग की है। पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर द्वारा लगाए गए इस आरोप पर बनारस में जेल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
शिकायत के अनुसार अलीगढ़ निवासी कैदी सुनील के खिलाफ अलीगढ़, मेरठ, बरेली और वाराणसी समेत कई जिलों में आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज है। वह वाराणसी जिला जेल में बंद था। अन्य मामलों में उसे जमानत मिल गई थी, लेकिन अलीगढ़ के आईटी एक्ट के मुकदमा अपराध संख्या 16/2023 थाना साइबर क्राइम में उसे जमानत नहीं मिली है।
अभिलेखों के अनुसार एसीजेएम-4 (अलीगढ़) का एक फर्जी जमानत आदेश वाराणसी जिला जेल में चार मार्च 2025 को प्राप्त दिखाया गया। इसके आधार पर सुनील को एक-दो दिन बाद जेल से छोड़ दिया गया। जबकि इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत याचिका संख्या 26163/2024 अभी लंबित है, जिसमें 25 मार्च 2025 को डेट लगी है। पूर्व आईपीएस का आरोप है कि पूर्व अधीक्षक उमेश कुमार सिंह के कार्यकाल में फर्जी जमानत आदेश पर सुनील वाराणसी जेल से बाहर आ गया।
क्या बोला जेल प्रशासन
इस बारे में जिला जेल वाराणसी के अधीक्षक सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि शिकायत की जानकारी मिली है। अभिलेखों के अनुसार रिहाई आदेश से पहले अलीगढ़ पुलिस लाइन से वाराणसी पुलिस लाइन रेडियोग्राम आया था। वाराणसी पुलिस लाइन से रोडियोग्राम की सूचना जेल में आई। रिहाई आदेश भी आया है। 25 फरवरी को रेडियोग्राम आया था। चार मार्च को रिहाई आदेश मिला था। सात मार्च को बंदी सुनील को रिहा किया गया। रोडियोग्राम और रिहाई आदेश दोनों की जांच की जा रही है।